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Chandigarh-Haryana News: एक साल में 50 लाइनमैनों की मौत, अब जागा बिजली विभाग

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ऊर्जा निगम कर्मचारियों को मिलेगी सुरक्षा किट, मृतकों व घायलों को मुआवजा भी देंगे
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मंत्री के पास मामला पहुंचने के बाद अब यूएचबीवीएन की ओर से जारी किए गए निर्देश

कुलदीप शुक्ला
चंडीगढ़। ऊर्जा निगम कर्मचारियों को अब सुरक्षा किट मिल सकेगी। इसके साथ ही हादसों में जान गंवाने वाले कर्मचारियों के परिजनों और घायल कर्मचारियों को मुआवजा भी मिलेगा। बिजली विभाग में अरसे से लापरवाही चल रही थी। लाइनमैन और सहायक लाइनमैन की सुरक्षा व्यवस्थाओं में कमी के चलते बीते एक साल में 50 से अधिक कर्मचारियों की करंट लगने से मौत हो चुकी है जबकि बड़ी संख्या में घायल हुए हैं। अगर इन्हें समय पर सुरक्षा किट उपलब्ध करवाई जाती तो इनकी जान बच सकती थी।

प्रदेशभर में करीब 15 हजार पक्के कर्मचारी (7 हजार लाइनमैन और 8 हजार सहायक लाइनमैन) व तकरीबन 10 हजार हरियाणा कौशल रोजगार निगम (एचकेआरएन) के तहत कार्यरत कर्मचारी फील्ड में तैनात हैं। अभी तक इनकी सुरक्षा भगवान भरोसे है। कर्मचारी यूनियन के मुताबिक विभागीय लापरवाही के चलते एचकेआरएन के कर्मचारियों को सुरक्षा किट नहीं दी जा रही है।
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ऊर्जा मंत्री अनिल विज तक मामला पहुंचने के बाद उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएन) ने अब आदेश जारी किया है कि सभी कर्मचारियों को सुरक्षा किट उपलब्ध करवाई जाए। साथ ही दुर्घटनाओं में मृतक व घायल कर्मचारियों को अधिसूचना 8 जुलाई 2019 और उसके संशोधन 5 अप्रैल 2025 के तहत मुआवजा दिया जाएगा। सभी अधिकारियों को इन आदेशों का कड़ाई से पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। एक साल में 50 कर्मचारियों की मौत की बात यूएचबीवीएन की तरफ जारी पत्र में स्वीकार की गई है।

अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा का कहना है कि सुरक्षा उपकरणों की 40 फीसदी तक कमी है। इनमें दस्ताने, हेलमेट, गम बूट, रेनकोट, जैकेट, अर्थ स्टिक, सेफ्टी बेल्ट, टॉर्च, प्लायर, पेचकस, सीढ़ी, ट्रॉली, ट्रांसफार्मर लोडिंग-अनलोडिंग के लिए लिफ्ट और इंसुलेटेड वायर कटर जैसे उपकरण शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन कर्मचारियों को सुरक्षा किट मिलती भी है उन्हें शिफ्ट-वार साझा करनी पड़ती है यानी एक कर्मचारी ड्यूटी खत्म कर उपकरण दूसरे को सौंपता है।

लांबा ने कहा कि सरकार 50 मौतों की बात मान रही है लेकिन असल आंकड़ा 100 से ज्यादा है। यह कर्मचारियों की मजबूरी है कि उन्हें बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों के रोज 11 हजार से लेकर 33 हजार केवी तक की लाइन पर काम करना पड़ता है। यह मुद्दा कांग्रेस विधायक जस्सी पेटवाड़ ने विधानसभा में जोर-शोर से उठाया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर सरकार ने जल्द सभी कर्मचारियों को सुरक्षा किट उपलब्ध नहीं करवाई तो विधानसभा से सड़क तक आंदोलन किया जाएगा।
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स्पष्ट है कि बिजली विभाग हादसों पर आंखें मूंदे बैठा रहा और जब मौतों का आंकड़ा 50 पार कर गया। अब जाकर यूएचबीवीएन की ओर से कर्मचारियों को सुरक्षा किट देने के आदेश जारी किए गए हैं। सवाल यह है कि क्या अब हालात बदलेंगे या फिर यह आदेश भी कागजों तक ही सीमित रहेंगे।
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