अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। राइट टू एजूकेशन (आरटीई) की सीटें समय पर फाइनल सबमिट न होने के कारण हरियाणा के 2,808 प्राइवेट स्कूलों का एमआईएस पोर्टल पिछले आठ महीनों से बंद है जिससे बच्चों के ऑनलाइन दाखिले पूरी तरह ठप हो गए हैं।
अपूर्ण जानकारी के बावजूद शिक्षा विभाग ने स्कूलों को कोई पूर्व सूचना दिए बिना 30 हजार से 1 लाख रुपये तक जुर्माना थोपते हुए नोटिस जारी कर दिए। इसी फैसले के विरोध में प्राइवेट स्कूल संघ ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र लिखकर पोर्टल तुरंत खोलने और सात प्रमुख मांगों को पूरा करने की अपील की है।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष सत्यवान कुंडू ने पत्र में कहा कि दस्तावेज अपलोड करते समय तकनीकी त्रुटि होने पर स्कूलों को पहले मेल या फोन से सूचित किया जाए, न कि सीधे भारी-भरकम जुर्माना लगाया जाए।
पत्र में उठाई गईं प्रमुख मांगें
हजारों स्कूल सोसाइटियों के जुर्माना माफी पत्र शीघ्र जारी किए जाएं।
(मुख्यमंत्री ने 17 अक्तूबर को प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया था।)
चिराग योजना, आरटीई और 134ए के तहत लंबित भुगतान समय पर जारी किए जाएं।
सभी गैर-मान्यता प्राप्त विद्यालयों को शिक्षा का अधिकार कानून 2011 के अपेंडिक्स फर्स्ट (वन–वन क्लास) के अनुसार मान्यता दी जाए।
10 अप्रैल 2007 से पूर्व स्थापित सभी अस्थायी या परमिशन धारक स्कूलों को भाजपा के 2014 घोषणा पत्र के अनुरूप एकमुश्त स्थाई मान्यता प्रदान की जाए।
फायर सेफ्टी की तरह हाइजीनिक सर्टिफिकेट की वैधता भी तीन वर्ष की जाए।
स्कूल बसों की आयु सीमा बढ़ाई जाए तथा बस टैक्स, प्रॉपर्टी टैक्स और अन्य टैक्स समाप्त किए जाएं।
महापुरुषों की जयंती पर छुट्टी देने या कार्यक्रम आयोजित करने का अधिकार स्कूलों को सौंपा जाए।