- सबसे अधिक 4,400 करोड़ रुपये ग्रामीण घरेलू उपभोक्ता के पास बकाया
- उद्योगों के पास 1,063 और सरकारी विभागों में 389 करोड़ रुपये फंसे
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश के 22.21 लाख बिजली उपभोक्ता बिजली वितरण निगमों के 7695.62 करोड़ रुपये दबाकर बैठे हैं। इनमें सबसे अधिक घरेलू ग्रामीण उपभोक्ता, फिर औद्योगिक उपभोक्ता और तीसरे स्थान पर सरकारी विभाग आते हैं। प्रदेश के दोनों बिजली निगमों ने डिफॉल्टर उपभोक्ताओं की संख्या और बकाया राशि जारी की सूची जारी की है। इनमें दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) के 4,864.80 करोड़ रुपये और उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएन) के 2,830.82 करोड़ रुपये हैं।
ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं के पास सबसे अधिक 4,400 करोड़ रुपये बकाया हैं। शहरी घरेलू उपभोक्ताओं के तकरीबन 834 करोड़ रुपये, गैर घरेलू के लगभग 770 करोड़ रुपये, औद्योगिक इकाइयों के पास 1,063 करोड़ रुपये और सरकारी विभागों के 389 करोड़ रुपये सहित अन्य श्रेणियों में भी राशि बकाया है।
डीएचबीवीएन में ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं पर 3,183.41 करोड़, औद्योगिक उपभोक्ताओं पर 435.29 करोड़ और सरकारी विभागों पर 216.92 करोड़ की राशि बकाया है। यूएचबीवीएन में ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं पर 1,216.61 करोड़, औद्योगिक उपभोक्ताओं पर 627.93 करोड़ और सरकारी विभागों पर 172.98 करोड़ रुपये बकाया है।
बिजली निगमों ने भुगतान के लिए दी है छूट
दोनों बिजली निगमों ने डिफॉल्टर उपभोक्ताओं के लिए बकाया बिल पर लगे सरचार्ज में 100 फीसदी छूट की योजना चला रखी है। छह महीने के लिए लागू इस योजना में दो महीने बचे हैं। उपभोक्ता किस्तों में भी बकाया चुका सकते हैं। घरेलू उपभोक्ताओं को बकाया बिल पर लगे सरचार्ज में 100 फीसदी छूट मिलेगी। इंडस्ट्री और दूसरे उपभोक्ताओं को भी लंबित बिल पर 50 फीसदी सरचार्ज माफी की सुविधा मिलेगी।
डिफॉल्टरों पर शिकंजे की तैयारी
बिजली निगम सीधे वसूली की जिम्मेदारी निभाएंगी। डोर-टू-डोर अभियान चलाकर उपभोक्ताओं को भुगतान के लिए प्रेरित किया जाएगा। नोटिस जारी किए जाएंगे। डिफॉल्टरों का डेटा डिजिटल पोर्टल पर अपलोड होगा, ताकि भविष्य में सेवाएं लेने से पहले बकाया स्थिति साफ रहे। दोनों निगमों को नियमित प्रगति रिपोर्ट सरकार को भेजनी होगी।