हरियाणा में पैदा होने वाले नवजातों की जन्मजात बीमारियों की जानकारी जन्म के समय ही लग जाएगी। इससे नवजात शिशु भविष्य में गंभीर बीमारियों से ग्रस्त होने से बच जाएंगे।
अमेरिका में बच्चों के जन्म के समय ही उनकी एड़ी (हील) से एक बूंद खून लेकर उनके करीब 40 टेस्ट किए जाते हैं, और भविष्य में होने वाली या समय के साथ पनपने वाली बीमारियों का पता लगा दिया जाता है।
चंडीगढ़ के जीएमसीएच 32 के साथ मिलकर इस जांच प्रक्रिया को हरियाणा आगे बढ़ाएगा। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर अंबाला, पंचकूला, यमुनानगर सहित उत्तर हरियाणा के करीब छह जिलों के सरकारी अस्पतालों में पैदा होने वाले नवजात शिशुओं का यह ब्लड टेस्ट करवाया जाएगा।
अमेरिका से इस विषय पर अध्ययन करके लौटे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डा. राकेश गुप्ता ने बताया कि बच्चों के खून के सैंपल जिला अस्पतालों से इकट्ठे कर चंडीगढ़ स्थित जीएमसीएच भेजे जाएंगे।
जहां पर शुरुआती दौर में करीब छह ऐसे परीक्षण किए जाएंगे। योजना पर विस्तार से काम होने में दो से तीन माह लग जाएंगे। डा. राकेश गुप्ता ने अमर उजाला को बताया कि अमेरिका में नवजात के इस तरह के करीब 40 परीक्षण होते हैं। जिससे उन बीमारियों का पता चल जाता है जो हम देख नहीं सकते।
बच्चों की शरीर का मेटाबालिज्म भी पता चल जाता है। हम इसमें हाइपो थायराइड, फिनाइल कीटो न्यूरिया सहित कुल छह परीक्षण करेंगे। उन्होंने बताया कि हर वर्ष हरियाणा में साढ़े पांच लाख बच्चे पैदा होते हैं। हम इनमें से दस हजार ऐसे बच्चों की जिंदगी या तो बदल देंगे या सुधार देंगे। शुरुआत में हम 100 बच्चों के खून का सैंपल लेकर परिणाम पता लगाएंगे।