भिवानी। लंबे समय तक पानी में काम करना सेहत के लिए खतरा साबित हो रहा है। इसकी वजह से नाखूनों में फंगस होने के मामले सामने आ रहे हैं। इसके मरीजों को ठीक होने में चार से छह माह लग रहे हैं। इन बीमारी का खतरा सर्दियों में अधिकतर रहता है क्योंकि हाथ-पांव गीले होने के कारण उनमें देर तक नमी बनी रहती है। इसकी वजह से यह बीमारी होने की आशंका है। नागरिक अस्पताल की ओपीडी में भी इस बीमार के प्रति माह 30 से 35 मामल सामने आ रहे हैं, जिनमें अधिकतर महिला मरीज शामिल है। मधुमेह के रोगियों में भी इस बीमारी मिल रही है।
नाखून में रक्षात्मक कवच होता है। चिकित्सकों का कहना है कि लंबे समय तक पानी में हाथ या पैर का नाखून रहने की वजह ये यह रक्षात्मक कवच गलने लग जाता है। साथ ही गृहिणीयों का सबसे अधिक काम पानी, साबुन के प्रयोग में अधिक रहता है। साबुन के प्रयोग से कास्टिक सोडा भी इस कवच को हानि पहुंचा रहा है। इसकी वजह से नाखून में फंगस हो जाती है, जोकि धीरे-धीरे रंग भूरा या फिर काला पड़ने लग जाता है। इन मामलों में मवाद होना भी सामने आया है। मधुमेह के रोगियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कम होती है, जिसके कारण उनके नाखून खराब होने लग जाते है। साथ ही नाखून टेडे होने के मामले भी मिल रहे हैं।
एक साल से अधिक समय से मेरे नाखून काले हो रहे हैं और धीरे-धीरे नाखून टूट भी रहे हैं। शुरुआत में मेडिकल स्टोर से ही दवा ली थी मगर बाद में चिकित्सक से सलाह ली तो उन्होंने फंगल इंफेक्शन बताया। अब त्वचा रोग विशेषज्ञ के परामर्श पर दवा ले रही हूं। पहले से काफी सुधार है।
- सुनीता देवी, मरीज।
नाखून में फंगस होने के कारण काफी दर्द रहता है। धूल-मिट्टी का काम करते समय ग्लव्स पहनती हूं। साथ ही पानी से बचाव का विशेष ध्यान रख रही हूं। सर्दी के सीजन में नाखूनों में अधिक दिक्कत रहती है।
- सोनिया शर्मा, मरीज।
इन बातों का रखें ध्यान
- मधुमेह के मरीज अधिक देर तक पानी में काम न करें।
- मरीज धूल मिट्टी और पानी से संबंधित काम करत समय ग्लव्स पहनें।
- काम पूरा करने के बाद हाथों को अच्छी तरह पोंछ लें, ताकि नमी न रहे।
- नाखून में फंगस की आशंका होने पर विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच करवा लें।
- बिना चिकित्सक की सलाह के कोई भी दवा या क्रीम न लगाएं।
- मेडिकल स्टोर स्टेरॉयड का युक्त दवाओं के सेवन से बचें।
इन दिनों अस्पताल की ओपीडी में फंगस इंफेक्शन के मरीज भी सामने आ रहे है। इनमें महिला मरीजों की संख्या अधिक रहती है। मरीज अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें और विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह पर ही दवा का सेवन करें। जब तक संक्रमण ठीक न हो जाए तब तक दवाइयां जारी रखें।
- डॉ. आदिति अग्रवाल, त्वचा रोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल।