भिवानी। अब पोस्टमार्टम के लिए जिले को पीजीआईएमएस रोहतक पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। नागरिक अस्पताल में ही गली-सड़ी हालत में मिले शवों का पोस्टमार्टम हो सकेंगे। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने नागरिक अस्पताल में फॉरेंसिक मेडिसिन चिकित्सक की नियुक्ति की है। इनके साथ ही अस्पताल को सात नए चिकित्सक मिले हैं, जिसमें से तीन रोग विशेषज्ञ हैं।
नागरिक अस्पताल में हर माह करीब 20 से 25 पोस्टमार्टम हो रहे हैं। माह की तीन से चार पोस्टमार्टम ऐसे होते हैं, जिन्हें नागरिक अस्पताल में नहीं किया जाता था, क्योंकि इन शवों की हालत काफी खराब चुकी होती है। इनके पोस्टमार्टम के लिए फॉरेंसिक मेडिसिन की आवश्यकता पड़ती है। अस्पताल में फॉरेंसिक मेडिसिन नहीं होने की वजह से उन्हें शवों को पीजीआई रेफर कर दिया जाता था, जिनकी रिपोर्ट आने भी डेढ़ से दो माह का समय लग जाता था। अब जिला मुख्यालय पर ही यह सुविधा होने के कारण जल्दी ही मौत की वजह का खुलासा हो पाएगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट जल्द होने से पुलिस भी कार्रवाई को तीव्र गति से कर सकेंगी।
माइक्रोबायोलॉजिस्ट की भी हुई नियुक्ति
हाल ही में नागरिक अस्पताल में माइक्रोबायोलॉजिस्ट की भी नियुक्ति हुई है। इससे पहले अस्पताल में कोई माइक्रोबायोलॉजिस्ट नहीं थे। यह बायोलॉजी की एक ब्रांच है, जिसमें प्रोटोजोआ, ऐल्गी, बैक्टीरिया, वायरस जैसे सूक्ष्म जीवाणुओं का अध्ययन किया जाता है। इसमें माइक्रोबायोलॉजिस्ट इन जीवाणुओं के इंसानों, पौधों और जानवरों पर पड़ने वाले पॉजिटिव और निगेटिव इफेक्ट को जानने की कोशिश करते हैं। बीमारियों की वजह जानने में ये मदद करते हैं। इसके अलावा जीन थेरेपी तकनीक के जरिये वे इंसानों में होने वाले सिस्टिक फाइब्रोसिस, कैंसर जैसे दूसरे जेनेटिक डिसऑर्डर के बारे में भी पता लगाते हैंं। अस्पताल में डॉ. मोनू के माइक्रोबायोलॉजिस्ट के पद पर नियुक्ति पाई है, जिन्हें कोविड लैब का इंचार्ज बनाया है।
हड्डी रोग विशेषज्ञ के साथ चार नए एमओ मिले
नागरिक अस्पताल में फिलहाल डॉ. राकेश शर्मा और डॉ. मुकेश श्योराण हड्डी रोग विशेषज्ञ के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। अब डॉ. अरविंद मलिक ने हड्डी रोग विशेषज्ञ के तौर पर ज्वाइनिंग की है। दिव्यांगजन जांच शिविरों के दौरान एक विशेषज्ञ की ड्यूटी कैंप में होती थी और एक की ओपीडी है। इसकी वजह से ऑपरेशन का काम प्रभावित हो जाता था। ऐसे में ओपीडी, ऑपरेशन के साथ जांच शिविरों का काम भी सुचारु रूप से चल सकेंगे। इनके अलावा चार मेडिकल ऑफिसर ने ज्वाइनिंग की है, जोकि नागरिक अस्पताल की ओपीडी में अपनी सेवाएं देगें।
नागरिक अस्पताल में फॉरेंसिक विशेषज्ञ नहीं होने की वजह से कई पोस्टमार्टम पीजीआई रेफर कर दिए जाते थे। ऐसे में अब फॉरेंसिक विशेषज्ञ की नियुक्ति होने से पोस्टमार्टम के लिए शव रेफर नहीं करने पड़ेगें। साथ ही अस्पताल को नए हड्डी रोग विशेषज्ञ और चार मेडिकल ऑफिसर मिले हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं अधिक बेहतर हो पाएंगी।
- डॉ. एडविन, प्रधान चिकित्सा अधिकारी।