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Bhiwani News: वोट हो सै मन का, किस को करू बताऊं नहीं, पर वोट जरूर डालूंगी

Mon, 20 May 2024 05:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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 झिमा देवी
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जूई। प्रदेश की सबसे अधिक आयु की मतदाताओं में शामिल जिला के गांव जूई खुर्द निवासी झिमा देवी को लोकतंत्र के महापर्व का बेसब्री से इंतजार है कि कब चुनाव का दिन आए और वे बूथ पर जाकर अपना वोट डाले। वोट डालने के प्रति झिमा देवी का जज्बा युवा मतदाताओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। झिमा कहती हैं कि वे नाम तो नहीं बताएंगी, पर वोट जरूर डालेंगी। जो भी निर्वाचित हो, उसका भला हो। वे उनको वोट देना चाहती हैं, जो विकास करे और सार्वजनिक काम करवाए।
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जिले में सबसे बुजुर्ग मतदाताओं में शामिल 105 वर्षीय झिमा देवी के अनुसार वे वोट बनने के साथ ही अपना वोट डालती आ रही हैं। जो देश की आजादी के समय से ही जारी है। उन्होंने बताया कि स्वतंत्र भारत में वर्ष 1952 में हुए पहले आम चुनाव में मतदान किया था। उन्होंने कहा कि अपना वोट ही है, जिससे हम अपने मनपसंद नेता का चुनाव करते हैं। उन्होंने कहा कि जब उनका मनपसंद प्रत्याशी जीतता है तो बहुत खुशी होती है। झिमा देवी ने कहा कि वोट डालने के लिए उनके मन में वैसा ही चाव है, जैसा पहली बार वोट डालने के समय था। अबकी बार भी उनको चुनाव के दिन का इंतजार है। चुनाव में वह अपने वोट का प्रयोग जरूर करेंगी। संवाद

उम्र के इस पड़ाव के दौरान देखा है अलग-अलग दौर

झिमा देवी ने उम्र के इस पड़ाव तक अलग-अलग दौर देखे हैं। अब तक सभी चुनावों में अपना वोट डालती आ रही झिमा ने कहा कि एक वो भी समय था। जब न बिजली थी, न सड़क थी और न पानी था। इससे भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था। बिजली न होने से मिट्टी तेल के दीये जलाते थे। बिजली और सड़क बनने और बाद में पानी आने से जिंदगी कुछ आसान हुई। रोजमर्रा के काम आसानी से होने लगे। उन्होंने कहा कि बेटा आज तो सब कुछ है, पहला तो कुछ भी कोनी था। गुरुकुल पंचगांव में कक्षा तीन तक पढ़ी झिमा देवी का यह जज्बा विशेषकर उन मतदाताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं, जो मतदान करने में सुस्त हैं।
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सुभाषचंद्र बोस घना बढ़िया आदमी था

झिमा देवी अपने पुराने दिनों को याद कर बताती हैं, उन्होंने अंग्रेजों की गुलामी के दिन देखे हैं। महात्मा गांधी के आन्दोलन को भी देखा है। बेटा सुभाषचंद्र बोस जिसा आदमी तो होने का ये कोनी। आजादी के टेम पर हिन्दू-मुसलमान की मारकाट को याद करके आज भी रोंगटे खड़े हो जया स। पुराने टेम में लड़कियों को पढ़ने की इजाजत नहीं थी। लेकिन वो गुरुकुल पंचगांव में तीन तक पढ़ी हैं। अखबार पढ़ कर अपने आप को देश-दुनिया से अपडेट रखती हैं। वर्तमान में उसके परिवार में 25 सदस्य हैं। उनकी देखभाल कर रहे सबसे छोटे पुत्र रेलवे से रिटायर मनीराम श्योराण बताते हैं कि 105 साल की उम्र में भी स्वास्थ्य से बिल्कुल ठीक है। अपना काम खुद कर लेती हैं। बार-बार 25 मई को लेकर बात करती रहती हैं। वोट डालकर चुनाव में खुद की सरकार बनने का चाव आज भी उनका वैसा ही है।
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