भिवानी। गांव रोहनात के ग्रामीण मृतक वेद सिंह की अस्थियों का गांव के ही ऐतिहासिक कुएं में विसर्जन किया गया। इसके अलावा कुएं के पास उनकी याद में त्रिवेणी रोपित की गई।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण परिषद के राष्ट्रीय वाइस चेयरमैन डाॅ. राजू मेहरा जताई ने बताया कि गांव रोहनात के लोग अपनी जमीन पाने, गांव को शहीद का दर्जा देने व अन्य मांगों को लेकर बार-बार आंदोलन करते रहे हैं। गांव के हकों के लिए जारी संघर्ष के दौरान गत 12 सितंबर को धरनारत वेद सिंह ने अपनी जान दे दी। वेद सिंह की याद में रोपित की गई त्रिवेणी भविष्य में पेड़ बनकर युवा पीढ़ी को वेद सिंह व संतलाल की गांव के लिए किए गए संघर्ष के बारे में बताएगी। इस मौके पर दिवंगत वेदप्रकाश के भाई राजेंद्र, उनका पुत्र संदीप, भूप सिंह, कमेटी प्रधान विनोद पंडित, धर्मवीर फौजी, सुशील रोहनात, मिनी भारती, बाली, जयभगवान, नरेश, श्रवण, दीपक, विकास, बलदेवा, जागेराम, समशेर, उमेद सिंह, ओमबीर मौजूद रहे।
इज्जत की खातिर रोहनात में महिलाओं ने बच्चों सहित इस कुएं में लगा दी थी छलांग
भिवानी के गांव रोहनात का ऐतिहासिक कुआं, बरगद का पेड़ व जोहड़ आज भी अंग्रेजों के जुल्मों की याद दिलाते हैं। यह कुआं ठीक जलियांवाला बाग के कुएं की याद दिलाता है, जहां पर महिलाओं ने अपनी इज्जत बचाने के लिए बच्चों सहित इस कुएं में छलांग लगा दी थी। यह कुआं और इसके पास खड़ा बरगद का पेड़ यहां के बुजुर्गों पर की गई बर्बरता और शहादत के मूक गवाह हैं। दरअसल, गांव रोहनात ने 1857 की जन क्रांति में अहम भूमिका निभाई थी। अंग्रेजों ने दमन चक्र शुरू किया और जन क्रांति में भाग लेने वालों को फांसी दी या गोली से उड़ा दिया। गांव रोहनात के सैकड़ों क्रांतिकारी शहीद हुए। अंग्रेजों ने 20 जुलाई 1858 को रोहनात गांव की जोहड़ की जमीन को छोड़कर बाकी सारे गांव का रकबा व अन्य संपत्ति नीलाम कर दी।