भिवानी। पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी, टोल टैक्स में बढ़ोतरी ने ट्रांसपोर्ट को डेढ़ गुना तक महंगा कर दिया है। इस कारण महंगाई भी दोगुना तक बढ़ गई है। सबसे ज्यादा मार उद्योग जगत पर है। सर्जिकल उपकरण इतने महंगे हो गए हैं कि ग्राहक नहीं मिलने के कारण निर्माता बेचने के बजाय गोदाम में रखने को मजबूर हैं। ऐसे ही प्लास्टिक उद्योग पर भी बड़ी मार है।
टोल टैक्स बढ़ने की वजह से उद्योगपतियों को प्रति किलोमीटर तीन से चार रुपये अतिरिक्त खर्च हो गया है। इसके कारण जो ट्रक पहले 10 हजार रुपये में मिलता था, वह अब 13 से 14 हजार रुपये में मिल रहा है। माल ढोने वाले वाहनों के 10 रुपये प्रति किलोमीटर के अब 15 से 16 रुपये लिए जा रहे हैं। इनके अलावा टोल टैक्स का खर्च भी खुद उद्योगपति को ही वहन करना पड़ता है। लगातार बढ़ रही महंगाई के कारण उद्योग-धंधे बंद होने के कगार पर हैं। (संवाद)
ट्रांसपोर्ट महंगा, स्टील और लोहा भी महंगा
सर्जिकल उद्योग पर महंगाई की मार सबसे ज्यादा है। सर्जिकल पहले प्रति टेबल के निर्माण पर 23 से 24 हजार रुपये तक खर्च आता था, जिसे निर्माता 27 से 28 हजार रुपये तक में बेच देते थे। अब स्टील के दाम 380 रुपये, लोहे के दाम 80 रुपये किलो तक बढ़ पहुंच गए है। ट्रांसपोर्ट पहले ही डेढ़ गुना तक महंगा हो गया है। ऐसे में 23 से 24 हजार में बनने वाली टेबल के निर्माण पर ही 29 से 30 हजार रुपये खर्च आ रहा है, जबकि बाजार में इतने दाम देने के लिए कोई तैयार नहीं है। इसकी वजह से सर्जिकल टेबल का काम करने वालों के चेहरे पर मायूसी छाई हुई है। कई उद्योगपतियों के गोदाम तो तैयार माल से भरे पड़े हैं और उचित रेट का इंतजार कर रहे हैं।
उद्योग बंद होने के कगार पर
महंगाई के कारण उद्योग-धंधे बंद होने के कगार पर आ गए है। दिनोंदिन बढ़ रहे पेट्रोल-डीजल के दामों की वजह से ट्रांसपोर्ट महंगा हो गया है। साथ ही टोल की बढ़ी कीमतों ने तो कमर ही तोड़ दी है। पहले जो गाड़ी प्रति किलोमीटर 10 रुपये में जाती थी, अब वह 16 रुपये प्रति किमी जा रही है। इसके साथ ही तीन से चार रुपये प्रति किमी टोल की औसत भी आ रही है। सर्जिकल टेबल बनाने में प्रयोग होने वाले लोहे के दाम डेढ़ गुना से भी अधिक बढ़ गए हैं। साथ ही स्टील की कीमतें भी आसमान छू रही हैं। ऐसे में काम-धंधे प्रभावित हो गए हैं। जो टेबल पहले 23 से 24 हजार में बनकर तैयार होती थी, वो अब 29 से 30 हजार में बनकर तैयार होती है। ऐसे में मुनाफा तो दूर की बात है लागत ही नहीं मिल रही।
- जोरावर अली, प्रधान, भिवानी सर्जिकल एसोसिएशन।
ट्रांसपोर्ट हुआ महंगा
पेट्रोल-डीजल और टोल टैक्स की बढ़ी कीमतों की वजह से ट्रांसपोर्ट महंगा हो गया है। इसकी वजह से कच्चा माल को लाने और तैयार माले को भेजने का खर्च भी बढ़ गया है। ऐसे में उद्योगपतियों व व्यापारी का मुनाफा कम होना स्वाभाविक है। लगातार बढ़ रहे पेट्रोल-डीजल के दामों की वजह से हर व्यवसाय प्रभावित हुआ है, जिसके कारण उद्योग-धंधे प्रभावित हुए हैं। सरकार उद्योगों को छूट देने के बजाय उनकी कमर तोड़ने का काम कर रही है। पहले भी बजट में कुछ विशेष लाभ नहीं मिला और अब महंगाई की मार से उद्योग-धंधे अधिक प्रभावित हो गए है।
- धर्मबीर नेहरा, प्रधान, भिवानी इंडस्ट्रियल एसोसिएशन।
बढ़ती कीमतों से हर वर्ग परेशान
लगातार बढ़ती कीमतों की वजह से हर वर्ग प्रभावित हो रहा है। इसकी वजह से रसोई खर्च भी बढ़ गया है और आमजन का बजट भी बिगड़ गया है। सब्जियों और फलों को लेकर आने वाले वाहनों का भी अतिरिक्त खर्च हो गया है। पहले जो ट्रक 10 हजार रुपये के किराये में आता था, अब वह 14 से 15 हजार रुपये की कीमत का हो गया है। इसकी वजह से सब्जियों और फलों की लागत बढ़ गई है। साथ ही लगातार बढ़ रही गर्मी की वजह से फल और सब्जी खराब हो जाती, जिसकी वजह से सब्जियों और फलों के दाम अधिक हो गए हैं। ऐसे में व्यापारी को भी अधिक मुनाफा नहीं हो रहा।
- करनैल सिंह, दुकानकारी, सब्जी मंडी।
बुरी दृष्टि से बचाने वाले नींबू-मिर्च को ही लगी नजर
सामान्यत: घरों, दुकानों, प्रतिष्ठानों में बुरी दृष्टि से बचाने के लिए नींबू और मिर्च बांधे जाते हैं, ताकि नजर ना लगे। मगर पेट्रोल के बढ़ते दाम, टोल टैक्स की बढ़ी दरों ने इनको ही नजर लगा दी है। सब्जी मंडी में नींबू का भाव 200 रुपये प्रति किलो है, जबकि हरीमिर्च 60 से 70 रुपये प्रति किलो के हिसाब से मिल रही है। वहीं शहर की अन्य चौक-चौराहों और ग्रामीण क्षेत्र में तो ये दाम 10 से 20 फीसदी अधिक है।
सब्जियों और फलों की कीमतों की जानकारी
फल दाम सब्जी दाम
अंगूर 100 आलू 20
खरबूजा 50 प्याज 25
आम 200 मटर 80-90
अनार 100-120 हरीमिर्च 60-80
सेब 160-180 लहसुन 80-100
कीवी 100-110 करेला 60-70
अनानाश 70-80 अदरक 60-70
केला 50-60 नींबू 200
नोट: ये दाम प्रतिकिलो के हिसाब से है, जोकि दुकानदार से प्राप्त किए हैं।