भिवानी। स्वास्थ्य विभाग मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए जिलेभर में व्यापक प्रबंधों का दावा कर रहा है, लेकिन अस्पताल परिसर में ही बरसाती पानी में अस्पताल प्रशासन की अव्यवस्था दिखने लगी है, जहां मच्छर का लारवा भी पनपने लगा है। इससे मरीजों की सेहत पर भी डंक का खतरा बढ़ा है। अस्पताल परिसर में सीवर लाइन ठप है। कई जगहों पर बरसाती पानी की निकासी की भी व्यवस्था नहीं है। ऐसे में अस्पताल खुद अपने ही दावों से घिर चुका है।
पिछले साल जिले में डेंगू के 278 मामले सामने आए थे। इसके मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग ने जिलेभर में 29 रैपिड रिस्पांस टीमों का गठन किया है। जिलेभर में 164 निगरानी समितियों को डेंगू के मच्छर को पनपने से पहले ही खत्म करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जागरूकता के साथ डेंगू रोकने के लिए घर-घर दस्तक दी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने जिलेभर के 296 तालाबों में गंबूजिया मछली छोड़ी है। जिला मुख्यालय के अस्पताल सहित सब डिविजनल अस्पताल और सीएचसी में 74 बिस्तर लगाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग पूरे जिले में सर्वे भी कराया जा रहा है।
भिवानी में पिछले पांच साल में मिले केस
साल- मलेरिया- डेंगू- चिकनगुनिया-
2019- 3- 13 - 0
2020- 1 49- 0
2021- 0- 356- 0
2022- 1- 123- 0
2023- 1- 278- 0
2024- 0- 0- 0
स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे एंटी लारवा अभियान चलाएं। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नागरिक अस्पताल परिसर में पानी की निकासी के भी निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर मच्छर के लारवा की जांच कर ब्लड स्लाइड तैयार कर रहे हैं। जिला मुख्यालय पर भी वार्ड नौ को डेंगू आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। जिलेभर में डेंगू मरीजों के लिए 74 बेड भी आरक्षित हैं। - डॉ. रघुवीर शांडिल्य, सिविल सर्जन, भिवानी।