गांव कलिंगा में अमरू पाना की गली में जमा गंदा पानी।
भिवानी। महान स्वतंत्रता सेनानी पंडित नेकीराम शर्मा का पैतृक गांव कलिंगा जिले का सबसे बड़ा गांव है। आसपास के 12 गांवों की प्रधानी करने वाला यह गांव कागजों में तो आदर्श है लेकिन मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित है। भिवानी रोहतक मुख्य मार्ग पर 24 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम 25 मई 2007 को पधार चुके हैं। उन्होंने यहां विभिन्न प्रकार की विकास योजनाओं का शिलान्यास किया था। गांव में उनके आने की गवाही आज भी वह शिलान्यास पत्थर दे रहा है जिसके करीब ही पूर्व राष्ट्रपति ने अपने हाथों से हर्बल पार्क में त्रिवेणी लगाई थी। आज यह हर्बल पार्क देखरेख के अभाव में बदहाल हो चुका है।
गांव से बहुत सारे युवा सेवा में भर्ती होकर सरहदों पर खड़े होकर देश की रक्षा कर रहे हैं। काफी पूर्व सैनिक गांव में मौजूद हैं। इन्होंने देश की सुरक्षा में अहम योगदान दिया है। इस गांव के कई जवान सरहदों पर शहीद भी हुए हैं। कलिंगा गांव इतना बड़ा है कि यहां पर तीन पंचायतें हैं। तीनों पंचायत को अलग-अलग पाना में बांटा गया है। अमरू पाना, सवाई पाना और राजू पाना के सरपंच अलग-अलग हैं। खास बात यह भी है कि यहां के अधिकतर मसले पंचायती तौर पर ही सुलझा लिए जाते हैं। यहां पर 32 हजार से भी ज्यादा की आबादी रह रही है। इनमें से करीब 15 हजार मतदाता हैं। हालांकि गांव के विकास में 36 करोड़ का बजट खर्च कर दिया गया है परंतु मूलभूत सुविधाओं की कमी अब भी पूरी नहीं हो सकी है।
गांव की मौजूदा हालात
गांव के हालात देखे जाए तो वह बद से बदतर हो चुके हैं। अमरू पाना में केवल एक ही छोटा वाटर टैंक है, जिससे मुश्किल से एक पंचायत को ही पानी मिल रहा है अन्य दो पंचायत पानी से वंचित है। पंचायत के पास खुद की कोई भूमि नहीं है और न ही कोई ऐतिहासिक संग्रहालय है। कलिंगा में स्वास्थ्य सुविधा भी नहीं है। लड़के और लड़कियों के लिए 12वीं तक अलग-अलग सरकारी स्कूल है। यह बात कितनी उदास कर देने वाली है कि आज भी इस गांव के स्कूल की हालत ठीक नहीं हो रही है। बारिश के दिनों में लड़कियों को बाहर रहकर पढ़ना पड़ता है तो वहीं लड़कों के स्कूल की हालत भी ठीक नहीं है। पांच कमरे बने तो गए थे लेकिन वह भी पूरे नहीं हुए हैं। डिस्पेंसरी भी इस गांव में है। पर फिर भी गांव के जो हालात है इसे सुधारने के लिए कोई भी अहम कदम नहीं उठा रहा है और न ही कोई नेता गांव में झांकने के लिए जाता है। एक नाला है जो अभी तक कच्चा है न उसकी बाउंड्री हुई है। जिस वजह से गांव में मच्छर भी बहुत ज्यादा हो जाते हैं। वोट मांगने के लिए गांव में कई नेता आते तो हैं वायदे भी करते हैं लेकिन उसे अभी तक पूरा नहीं किया है।
बारिश में गांव में होता है जलभराव
बारिश में खेतों में पानी भर जाता है। वहीं गांव में भी पानी निकासी का कोई पुख्ता प्रबंध नहीं है। यह सब अहम मसले हैं, जिसे सुलझाने की उम्मीद में ग्रामीण इंतजार कर रहे हैं।
सबसे बड़ी समस्या पानी है : सरपंच सोनू
अमरू पाना के सरपंच सोनू ने बताया कि हमारे गांव में ऐसी बहुत सी समस्याएं हैं जिसे दूर करना जरूरी है। एक तो बारिश के दिनों में खेतों में पानी जमा हो जाता है। इससे किसान परेशान रहते हैं। दूसरा गांव में केवल एक ही छोटा वाटर टैंक है। जिससे तीनों पंचायत को पानी प्राप्त नहीं हो रहा है। एक और बड़ा बाटर टैंक गांव में बनाना जरूरी है ताकि तीनों पंचायत के लोगों को पानी की सुविधा मिल सके।
85 फीसदी से लड़कियां हुईं पास, मगर सुविधाएं नहीं : रणधीर सरपंच
गांव के सवाई पाना के सरपंच रणधीर ने बताया कि हमारे लिए बहुत ही गर्व की बात है कि हमारे गांव की 85 फीसदी लड़कियां पास हुई हैं पर स्कूल की हालत देखकर बहुत मायूसी होती है। पिछले 10 साल से बिल्डिंग की न तो बाउंड्री हुई है और न ही स्कूल में शौचालय है। बारिश के दिनों में स्कूल के सारे कमरों की छतों से पानी टपकता है। लड़कियों को कमरों के बाहर बैठना पड़ता है। इसी प्रकार लड़कों के लिए पांच कमरे सरकार ने बनवाए थे। परंतु वह भी अधूरे हैं न तो छत ढली है और न ही पलस्तर हुआ है। गांव में केवल एक वाटर टैंक है, जिससे पूरे गांव को पानी की सुविधा नहीं मिल रही है।