लोहारू में हिमाचल से वापस लौटे सदस्य परिजनों के साथ।
लोहारू (भिवानी)। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में बारिश में लोहारू के डॉ. विष्णु शर्मा और अशोक कुमार करीब 12 दिनों तक फंसे रहे। वे बुधवार को लोहारू पहुंच गए। उनके सकुशल लोहारू पहुंचने पर उनके परिजनों के चेहरे खिल उठे और मां ने दोनों लाडलों को तिलक कर खुशी जाहिर करते हुए भगवान का शुक्रिया अदा किया। प्राकृतिक आपदा के दौरान डॉ. विष्णु और अशोक ने सैंज वैली के माउंटेनव्यू रिजॉर्ट में 12 दिन बिताए। उन्होंने कहा कि हिमाचल की सुंदरवादियों में पहली बार भयावह मंजर देखा है, जिसे वे कभी नही भुला सकते।
लोहारू के डॉ. विष्णु शर्मा और अशोक कुमार ने बताया कि तीन-चार दिनों तक बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही थी। कहां किस ओर से भूस्खलन हो जाए इसका डर बना रहता था। हिमाचल प्रदेश सरकार या प्रशासन की कोई भी सहायता उन तक नही पहुंची। बस स्थानीय लोगों की कुछ मदद और स्वयं के खर्चे पर रिजॉर्ट में ठहरे रहे। पूरे दिन में दो से तीन घंटे की नींद लेते वह भी एक-एक करके। पता नहीं किस ओर से कब पेड़ टूट जाए या तेज बारिश का बहाव आ जाए। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक आपदा के साथ-साथ कमरे में जंगली बिच्छू और सांपों का डर भी बना रहता था।
दोनों युवकों ने अपनी कार को हिमाचल के रिजॉर्ट में छोड़ दिया और 17 किलोमीटर लंबा दुर्गम पहाड़ियों का रास्ता पैदल तय किया। 12 दिनों के दौरान हिमाचल में अनेक मुसीबतों का सामना किया। डॉ. विष्णु शर्मा के पिता मुरारी शर्मा, ताऊ रामअवतार शर्मा, भाई देवेंद्र शर्मा, पत्नी पूनम और अशोक के पिता सजन शर्मा ने कहा कि हिमाचल के कुल्लू और मनाली में प्रकृति कहर बरपा रही है। वहां के अनेक रास्ते बंद हो चुके हैं। हिमाचल में प्रकृति की तबाही का नजारा वे टीवी चैनलों पर लगातार देख रहे थे और भगवान से अपने लाडलों के सकुशल पहुंचने की प्रार्थना कर रहे थे। बुधवार को दोनों युवक सकुशल लोहारू पहुंच गए।
17 किलोमीटर का दुर्गम सफर 11 घंटों में किया पार, तब मिली वाहन सुविधा
डॉ. विष्णु और अशोक ने बताया कि वे मंगलवार को सुबह पांच बजे पैदल ही मंडी जिला के लिए रवाना हुए थे। स्थानीय लोगों से रास्ता पूछते हुए शाम चार बजे ओट स्थान पर पहुंचे थे। वहीं से मंडी शहर तक टैक्सी ली। मंडी से चंडीगढ़ तक का सफर तय किया। बाद में चंडीगढ़ से रोडवेज की बस में लोहारू तक पहुंच पाए। दोनों युवकों ने हिमाचल प्रशासन और हरियाणा प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। कहा कि हिमाचल प्रशासन ने उनसे कोई संपर्क नहीं किया और न ही कोई राहत सामग्री भेजी। यहीं नहीं परिजनों से भी इस दौरान कोई संपर्क नहीं करवाया, जिसको लेकर सैलानियों में काफी रोष था।