भिवानी। नई वार्डबंदी की हद में आई कॉलोनियों के अधिकृत होने का रास्ता साफ हो गया है। विधानसभा चुनावों से पहले अनधिकृत कॉलोनियों को अधिकृत किए जाने की घोषणा हो सकती है। भिवानी शहर में 35 अनधिकृत कॉलोनियों का मसौदा मुख्यालय जा चुका है।
इन कॉलोनियों में फिलहाल कोई अड़चन नहीं आई है, ऐसे में इनके अधिकृत होने की संभावनाएं हैं। ये कॉलोनियां बेहद छोटी हैं। ऐसे में इनके दायरे और सीमाओं को लेकर भी अब कोई विवाद या आपत्ति नहीं है।
भिवानी शहर में 31 वार्ड आते हैं। नगर परिषद की नई वार्ड बंदी के बाद शहरी दायरे के कुछ वार्ड तो इतने बड़े हो गए हैं कि उनमें से भी अब अलग वार्ड बनाने की दरकार है। यही हाल शहरी दायरे और जनसंख्या का है। शहरी आबादी भी तीन लाख आठ हजार तक पहुंच गई है। शहर की सीमाएं अब आसपास के गांवों को भी छू गई हैं। ये गांव शहर में है या शहर गांव में है, इस पर भी लोगों को अब असमंजस होने लगा है, क्योंकि कई गांवों के कृषि भूमि शहरी दायरे के अंदर ही हैं, जिन पर कॉलोनाइजरों ने प्लाट काटकर बिक्री कर दिए हैं, जिन पर अब लोग अपना आशियाना बनाकर रहने लगे हैं।
भिवानी नगर परिषद ने शहरी दायरे में शामिल करने के लिए 35 अनधिकृत कॉलोनियों को अधिकृत कराने का प्रयास तेज कर दिया है। इस बार पांच साल में शहरी दायरे में नई वार्डबंदी की गई थी। जिसमें शहर की जनसंख्या तीन लाख से कम है, लेकिन मौजूदा समय में शहर की जनसंख्या तीन लाख से कहीं अधिक है। कॉलोनी अधिकृत होने के बाद निश्चित तौर पर शहर का दायरा बढ़ेगा और लोगों के लिए जनसुविधाओं में विस्तार होगा।
-सतेंद्र मोर, उप प्रधान नगर परिषद भिवानी।
शहर में अधिकृत कॉलोनियों के अलावा अब भी काफी दायरा ऐसा है, जिसे अधिकृत किया जाना बेहद जरूरी है। शहर में 35 साल पुरानी कॉलोनियों को अब तक अधिकृत नहीं किया गया है। सरकार अगर इन कॉलोनियों को अधिकृत करती है तो ज्यादा लोगों तक सुविधाएं और सरकार की योजनाएं पहुंचेंगी। कई वार्डों में अधिकृत कॉलोनी कम अनधिकृत इलाका ज्यादा है, जहां जनसुविधाओं की काफी सालों से दरकार बनी है।
-सुभाष तंवर, पार्षद वार्ड 17 भिवानी।
नगर परिषद में नई वार्ड बंदी के हिसाब से भी काफी दायरे में शहर बढ़ गया है। नई कॉलोनियां अधिकृत होंगी तो शहर का दायरा बढ़ेगा। इसमें नगर परिषद के बजट लोगों को जनसुविधाएं मुहैया कराने के लिए काम कराए जा सकेंगे। फिलहाल इन कॉलोनियों में डी प्लान से ही बजट खर्च किया जा रहा है, जिससे कुछ सुविधाएं ही लोगों को मुहैया कराई जा रही हैं।
-संदीप यादव, पार्षद वार्ड नंबर दो भिवानी।
भिवानी नगर परिषद का दायरा और जनसंख्या दोनों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में लोगों को भी अब सुविधाओं की मांग उठ रही है। कॉलोनी अधिकृत होगी तो उसके अंदर नगर परिषद के बजट से पार्षद द्वारा काम कराना आसान होगा। स्ट्रीट लाइट, सड़क निर्माण के साथ-साथ सार्वजनिक कार्य भी होंगे। शहरी दायरे की बाहरी कॉलोनियों के वार्ड तो ऐसे हैं, जहां अधिकृत एरिया कम अनधिकृत इलाका ज्यादा है, जहां लोगों के आवास की रजिस्ट्री तक नहीं हो रही हैं।
-अनिल कुमार पार्षद प्रतिनिधि वार्ड 18 भिवानी।