भिवानी। शहर के दशकों पुराने जोहड़ अपना ऐतिहासिक स्वरूप तो खो ही बैठे, लेकिन दार्शनिक स्थल भी नहीं बन सके। सात साल पहले मुख्यमंत्री ने दस करोड़ के बजट की घोषणा ऐतिहासिक जोहड़ों को दार्शनिक स्थल में विकसित करने के लिए की थी। पांच साल पहले इस पर काम भी शुरू हुआ और करोड़ों का बजट भी खर्च कर डाला, लेकिन शहर में पुराने जोहड़ आज भी बदहाल पड़े हैं। ग्राउंड रिपोर्ट में पुराने जोहड़ों की हालत जानी तो अधिकतर जोहड़ तो अवैध कब्जों व अतिक्रमण का शिकार हो चुके हैं। दस एकड़ से महज दो एकड़ में सिमटे ये पुराने जोहड़ अब अपने ऐतिहासिक स्वरूप भी गवां चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने 2015 में अनाज मंडी में आयोजित रैली में शहर के पुराने ऐतिहासिक जोहड़ों को दार्शनिक स्थल के रूप में विकसित करने के लिए करीब दस करोड़ के बजट की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री की घोषणा पर शहरी निकाय एवं विकास विभाग से 2017 में बजट की पहली खेप भेजी गई। इसके बाद भिवानी नगर परिषद ने ऐतिहासिक जोहड़ों के पुराने स्वरूप को हटाकर नए स्वरूप में उन्हें दार्शनिक स्थल बनाने के लिए ठेके पर काम शुरू करा दिया। लेकिन ठेकेदारों ने बजट को चंद दिनों में ही समेट डाला और फिर बजट की मांग कर दी। बजट नहीं मिलने के बाद ठेकेदारों ने भी काम अधर में ही छोड़ दिया। जिला प्रशासन भी निरीक्षण कर हालातों को जांचने में ही जुटा रहा और कार्यालय फाइलों की उथल पुथल में जुटा रहा। धरातल पर अधर में लटके जोहड़ों के काम को आज तक पूरा नहीं किया गया। अब हालत यह है कि जो काम बीच में छोड़ा था वह भी बिगड़ गया। पुराने जोहड़ न ऐतिहासिक रहे न दार्शनिक स्थल बने, बल्कि दलदली पानी में हर साल हादसे होने लगे। कुछ जोहड़ों के चारों तरफ लोगों ने अतिक्रमण शुरू कर दिया और कई जोहड़ों के किनारों पर तो अब भी लोग मलवा डालकर उन्हें पाटने में लगे हैं, ताकि इन पर बाद में काबिज हो सकें।
ये हैं शहर में ऐतिहासिक जोहड़
- नुनसर जोहड़
- सेठ मूलचंद जोहड़
- डोभी तालाब
- हनुमान जोहड़ी तालाब
- तोरंगवाला जोहड़
मूलचंद जोहड़ में नहीं बारिश के पानी की निकासी, संस्था ही करा रही है पार्क का रखरखाव
शहर के बीचोंबीच बने सेठ मूलचंद जोहड़ का काम भी अभी अधूरा ही पड़ा है। इसमें बारिश के पानी की निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। यहां जोहड़ की जगह झील बनाई गई है। मगर झील के आसपास बने पार्क में बारिश में जलभराव हो जाता है। इससे बच्चों के झूले और ओपन जिम भी पानी में डूब जाती हैं। पार्क की हरियाली का रखरखाव भी आसपास के लोगों की कमेटी ही अपने खुद के खर्च पर करा रही है। झील के अंदर खराब पानी को भी बदली कराने की कोई व्यवस्था तक नहीं है। झील के चारों तरफ घनी आबादी हैं, जिसकी वजह से भी यहां गंदगी फेंकने की समस्या बनी है।
छोटी काशी की पहचान था डोभी तालाब, अब अस्तित्व पर खतरा
भिवानी के अस्तित्व और छोटी काशी की पहचान डोभी तालाब भी अपना अस्तित्व खो चुका है। इसके एक छौर पर ऐतिहासिक मंदिर बने हैं, जबकि दूसरे छौर पर घनी आबादी बसी है। पुराना जोहड़ भी गंदगी से अटा है और इसके चारों तरफ की चहारदीवारी भी अधूरी पड़ी है। आसपास के लोग भी अपना दायरा बढ़ाते हुए जोहड़ के काफी नजदीक आ चुके हैं। वहीं किनारों को पुराने मकानों से तोड़कर निकाला मलवा डालकर पाटा जा रहा है। इस जोहड़ को झील बनाने पर भी काफी बजट खर्च हुआ था, मगर उस बजट से ऐतिहासिक जोहड़ का तनिक सुधार नहीं हुआ है।
ये बोले शहरवासी
एक साल पहले डोभी तालाब की सफाई कराई थी। लेकिन अब फिर गंदगी से लबालब हो गया है। जिला प्रशासन से मांग है कि इस ऐतिहासिक स्थल को जल्द से जल्द झील बनाने का काम शुरू कराया जाए। आसपास काफी देवालय हैं, जिनमें आस्था और भिवानी का इतिहास दोनों ही बसा है।
- महंत डोभी गिरी महाराज।
जोहड़ को दार्शनिक स्थल बनाने का काम कई सालों से बंद पड़ा है। जोहड़ का पानी खराब हो चुका है। बारिश में यहां बुरे हालात हो जाते हैं। कई बार यहां हादसे हो चुके हैं। अगर जल्द इसे झील बनाने का काम शुरू होता है तो शहर के लिए धार्मिक और पर्यटन दोनों ही स्थल बन सकेंगे, क्योंकि आसपास भिवानी आबाद होने के समय से मंदिर हैं।
-शेर सिंह।
हमने शहर के पुराने जोहड़ों को दार्शनिक स्थल बनाने के लिए जोहड़ों का एस्टीमेट बनाया है। जोहड़ों को झील बनाकर इनके अंदर पानी को पंपिंग के जरिये बदली किए जाने की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके लिए जल्द टेंडर कराए जाएंगे।
-भवानी प्रताप, चेयरपर्सन प्रतिनिधि नगर परिषद भिवानी।