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Bhiwani News: शॉर्ट सर्किट से लगी थी गद्दा फैक्टरी के अंदर आग, शेड गिरने से आग पर काबू पाने में आई दिक्कत

Tue, 02 Apr 2024 12:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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भिवानी। देवसर मोड़ के समीप गद्दा फैक्टरी के अंदर रविवार दोपहर लगी आग पर करीब 12 घंटे बाद पूरी तरह से काबू पाया गया। गद्दा फैक्टरी के अंदर आग शॉर्ट सर्किट से लगी थी। शेड गिरने से आग पर काबू पाने में दिक्कत आई।
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देर रात तक दमकल की तीन से चार गाड़ियां लगातार धधक रही आग पर काबू पाने में जुटी रही। वहीं दमकल की करीब 20 गाड़ियों की कड़ी मशक्कत के बाद आग रविवार देर रात तक शांत हुई। जब तक फैक्टरी में आग बुझी तब तक फैक्टरी के अंदर करोड़ों का माल राख हो चुका था।
फैक्टरी मालिक नितेष गोयल ने बताया कि उसे करीब साढ़े आठ करोड़ का नुकसान हुआ है। फैक्टरी के अंदर आग बिजली के शॉर्ट सर्किट से लगी है। आग लगने के बाद फैक्टरी का शेड नीचे गिर गया। फैक्टरी के अंदर गद्दा बनाने का फोम और कपड़ा भारी मात्रा में रखा था जो आग लगने के बाद शेड के नीचे दब गया और दमकल की गाड़ियां लोहे की टिन शेड के ऊपर पानी की बौछारें करती रहीं। मगर आग तक न तो पानी पहुंचा और न ही उस पर समय रहते काबू पाया जा सका।
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नितेष ने बताया कि उसने फैक्टरी के अंदर करीब 25 फायर सिलिंडर भी लगाए हुए थे। रविवार को छुट्टी थी तो दो से तीन लोग ही वहां मौजूद थे, जबकि लेबर वहां नहीं थी। जब आग लगने के बाद शेड माल के ऊपर गिरा तो फायर सिलिंडर भी उसी के अंदर नीचे दब गए। केवल तीन फायर सिलिंडर ही इस्तेमाल हुए, लेकिन जब आग ज्यादा बढ़ गई तो ये फायर सिलिंडर भी नाकाम हो गए। नितेष ने कहा कि उसकी फैक्टरी में बिजली के शॉर्ट सर्किट ने गद्दा बनाने वाले फोम को चंद मिनटों में ही खाक कर दिया। वहीं फैक्टरी के अंदर रखा सारा माल और फैक्टरी का ढांचा भी ध्वस्त हो गया।

फायर विभाग से सिर्फ सात उद्योगों की फायर एनओसी, ताक पर नियम रख चल रहे साढ़े पांच सौ छोटे उद्योग
भिवानी जिले में आपातकालीन सेवाएं एवं दमकल विभाग से एच श्रेणी की सिर्फ सात उद्योगों ने ही फायर एनओसी ली हैं, जबकि जिलेभर में करीब साढ़े पांच सौ से अधिक लघु उद्योग चलाए जा रहे हैं। इनमें अधिकांश केमिकल उद्योग के अलावा कपास की फैक्टरी हैं, जिनमें हर साल आग लगने से लाखों का नुकसान भी हो जाता है। मगर दमकल विभाग और जिला नगर योजनाकार विभाग के नियमों की पेचीदगी की वजह से इन उद्योगों में फायर सेफ्टी की न तो एनओसी हो पाती है न ही इनमें आग से सुरक्षा के कोई प्रबंध। ऐसे में छोटे फायर सिलिंडरों के सहारे ही आग जैसी घटनाओं को रोकने की कोशिश की जा रही है, जो वक्त पड़ने पर नाकाम साबित होती है।
जिले में चल रहे उद्योगों के साथ शिक्षण संस्थान और अस्पतालों के लिए फायर एनओसी की अलग-अलग श्रेणियां बनाई हुई हैं। सभी के लिए फायर एनओसी अनिवार्य की गई है। विभाग ने फायर एनओसी संबंधी नियमों को भी विभाग की वेबसाइट पर जारी किया है और फायर एनओसी लेने की प्रक्रिया भी पूरी तरह से ऑनलाइन है। सभी जगह आग से सुरक्षा के प्रबंध बेहद जरूरी हैं, जिससे जान माल की नुकसान से बचा जा सकता है।
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- याशिन खान, जिला दमकल अधिकारी, भिवानी।
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