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Bhiwani News: रेतीले टीले में खेत में धान की फसल का सपना हुआ साकार

Sat, 19 Oct 2024 10:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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बहल क्षेत्र के शहरयारपुर गांव में अपने खेत में धान की फसल की निगरानी करता किसान विरेन्द्र गुर्ज
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बहल। पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल ने लोहारू के रेतीले इलाके में ईख और धान की खेती का सपना देखा था और उसे साकार करने के लिए लिफ्ट इरिगेशन जैसी योजनाओं को लागू कर खेतों में नहरी पानी पहुंचाने का प्रयास किया था। उस समय भले ही उनका प्रयास फलीभूत नहीं हो पाया हो, पर पूर्व मंत्री जेपी दलाल के निर्देश पर बहल क्षेत्र के गांव शहरयापुर के एक किसान ने अपने खेत में धान की फसल उगाकर चौ. बंसीलाल के सपने को पूरा करने का प्रयास किया है।
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किसान विरेंद्र गुर्जर के खेत में लहलहा रही धान की फसल अगले 15 दिन में पककर तैयार हो जाएगी। किसान विरेंद्र गुर्जर ने सवा एकड़ भूमि में करीब दो महीन पहले धान की फसल उगाई थी। धान में बालियां लग गई हैं और अगले 15 से 20 दिन में धान पककर तैयार हो जाएगा।
किसान विरेंद्र का यह पहला प्रयोग था इसलिए धान की फसल का कुछ भाग बीमारी की चपेट में आकर खराब भी हो गया। विरेंद्र को अनुमान है कि करीब 20 क्विंटल प्रति एकड़ की पैदावार हो जाएगी। इससे उसे करीब एक लाख रुपये की आमदनी होने की उम्मीद है। किसान विरेंद्र अपने पहले प्रयोग से बेहद खुश हैं और इसके लिए वह पूर्व मंत्री जेपी दलाल का आभार जता रहा है कि उन्होंने उसे खेती में बदलाव के लिए प्रेरित किया।
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मन में शंका थी, पर हौसले बुलंद थे विरेंद्र गुर्जर के

किसान विरेंद्र गुर्जर धान की फसल उगाने से पहले सशंकित थे। तत्कालीन कृषि मंत्री जेपी दलाल ने हिम्मत बंधाई और धान की फसल उगाने के लिए प्रेरित किया। विरेंद्र ने अपने खेत की सवा एकड़ भूमि में यह प्रयोग किया और सफल रहा। अब विरेंद्र का सपना है कि वह धान के अलावा फल, फूल और सब्जियों की खेती ही करेगा।

नहरी पानी की उपलब्धता भी नहीं, फिर भी लहलहाई खेती

किसान विरेंद्र गुर्जर ने बताया कि उसने सुना था कि धान की खेती के लिए नहरी पानी की जरूरत होती है। पर, उसके पास नहरी पानी की उपलब्धता नहीं थी। ट्यूबवेल का पानी लगाकर ही काम चलाया। गनीमत रही कि प्रयोग सफल रहा और फसल पूरी तरह से तैयार हो गई। किसान ने बताया कि उसने धान की पौध अपने रिश्तेदार सुई निवासी प्रेमकुमार से ली थी और उनसे ही जानकारी लेकर फसल संबंधी काम को पूरा किया। विशेषज्ञ के तौर पर कृषि विशेषज्ञ डॉ. दीपक का मार्गदर्शन मिला जिन्होंने समय समय पर खेती में प्रयोग होने वाले रसायन और दवाओं की जानकारी दी।
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