भिवानी। तापमान 40 डिग्री तक पहुंच चुका है और लघु चिड़ियाघर में बब्बर शेर सिंबा और शिवा हांफने लगे हैं। गर्मी ने मादा शेरनी सुधा की बेचैनी भी बढ़ा दी है। ऐसे में चिड़ियाघर प्रशासन ने बाड़े में दो बड़े कूलरों की व्यवस्था कराई है, जिसकी हवा से ये वन्य जीव ठंडक पा रहे हैं। इतना ही नहीं हिमालयन भालू डूको और प्रीतो के बाड़े में भी दो कूलर लगे हैं। इसके आगे ये दोनों दिनभर गर्मी से राहत पाने के लिए आराम फरमा रहे हैं। तेंदुआ के बाड़े में भी एक कूलर लगाया गया है, ताकि गर्मी में तापमान बढ़ने का असर उनकी सेहत पर न पड़े।
भिवानी में 1982 से लघु चिड़ियाघर शहरवासियों के लिए मनोरंजन व दर्शनीय स्थल बना है। रोजाना ही 200 से 300 दर्शक यहां आते हैं। इसी साल की एक जनवरी को इंदौर से नर बब्बर शेर सिंबा को यहां लाया गया था। इससे पहले यहां नर बब्बर शेर शिवा भी है। मादा शेरनी सुधा है। गर्मी से बचाव के लिए बब्बर शेर के बाड़े की भूमि को कृषि यंत्र से बान (उखाड़ना) करा दिया है, ताकि भूमि के अंदर की ठंडक इन वन्य जीवों को मिल सके। जबकि बाड़े के पिंजरे में दो बड़े कूलर भी लगाए गए हैं, जिनके आगे ये शरीर के तापमान को संतुलित कर सकें। ये कूलर चौबीसों घंटे चलते हैं। इसी के साथ दिन में दो बार इन्हें नहलाया भी जा रहा है। जिस दिन गर्मी ज्यादा रहती है तो इन्हें जरूरत के हिसाब से ज्यादा बार भी नहला देते हैं।
बाड़े में दो पानी के होद भी हैं, जिसमें चौबीसों घंटे ताजा पानी चलाया जा रहा है। एक होद पेड़ की छांव के नीचे भी तैयार कराया है। हिमालयन भालू डूको और प्रीतो के बाड़े में भी दो बड़े कूलर लगाए हैं। दर्शकों की सुविधा के लिए कूलर को ऐसी जगह लगाया गया है ताकि आराम करने के दौरान भी दर्शक भालू का दीदार कर सकें। इसके लिए बाड़े में थोड़ा बदलाव भी किया गया है। क्योंकि भालू गर्मी की वजह से दिन भर कूलर के आगे ही आराम करता है। तेंदुआ का बाड़ा भी कूलर से ठंडक पा रहा है। यहां तेंदुआ सन्नी 17 साल का है। उसे 2012 में हिमाचल के शिमला चिडिय़ाघर से यहां लाया गया था, जबकि मादा तेंदुआ सोनिया को छत्तबीड़ पंजाब के चिड़ियाघर से 2019 में यहां लाया गया था। भालू डूको और प्रीतो के जोड़े को 2019 में यहां लाया गया था।
दरियाई घोड़े, घडिय़ाल व मगरमच्छ के बाड़े में भी पानी बदला
गर्मी की तपिश बढ़ी तो जलचर वन्य जीवों के लिए भी पानी की जरूरत बढ़ गई। ऐसे में चिड़ियाघर प्रशासन ने दरियाई घोड़े, घड़ियाल और मगरमच्छ के बाड़ों में ताजा पानी की व्यवस्था कराई है। ताकि इनके अंदर मछलियां छोड़ी जा सकें और पानी के अंदर प्राकृतिक आवास के साथ ये वन्यजीव पर्याप्त खुराक भी पा सकें।
लघु चिड़ियाघर में बब्बर शेर के लिए बाड़ में कूलर की व्यवस्था कराई है और दिन में दो बार नहलाया जा रहा है। बाड़े में पर्याप्त पानी के लिए दो होद भी तैयार कराए हैं। भालू और तेंदुआ के बाड़े में भी दो-दो कूलर लगवाए हैं। दरियाईघोड़ा, मगरमच्छ और घड़ियाल के बाड़े में भी ताजा पानी डाला गया है।
- सरदार परमजीत सिंह, इंचार्ज, चौ. सुरेंद्र सिंह मेमोरियल लघु चिड़ियाघर, भिवानी।