भिवानी। दिवाली से पहले ही शहर की आबोहवा प्रदूषित होने लग गई है। इसकी असर धनतेरस की रात और छोटी दिवाली को दिखने लग गया। दोनों ही दिन आसमान में धुएं की परत छा गई, जिसके कारण हवा में प्रदूषण फैल गया। हालांकि प्रशासन ने पटाखों सहित अन्य विस्फोटकों की आतिशबाजी पर रोक लगाई हुई है। बावजूद इसके शहर में कई जगह पर पटाखों की स्टॉल लगी मिली। जिन पर लोगों ने भी जमकर खरीददारी की। वहीं अब दिवाली पर अगर आतिशबाजी होती है तो शहर की हवा में सांस लेना भी मुश्किल हो जाएगा। पिछले साल दिवाली पर वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 पार हो गया था, जिसके कारण आंखों में दर्द, सांस लेने में तकलीफ के मामले सामने आए। पिछले दो-तीन दिनों से लगातार वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़ रहा है।
एयर क्वालिटी इंडेक्स के मानक
एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) को 0-50 के बीच बेहतर, 51-100 के बीच संतोषजनक, 101 से 200 के बीच सामान्य, 201 से 300 के बीच खराब, 301 से 400 के बीच बहुत खराब और 401 से 500 के बीच गंभीर माना जाता है। वहीं हवा में पीएम 10 का स्तर 100 और पीएम 2.5 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
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10 दिनों का वायु गुणवत्ता सूचकांक:
दिनांक एक्यूआई
23 अक्तूबर 180
22 अक्तूबर 200
21 अक्तूबर 105
20 अक्तूबर 173
19 अक्तूबर 142
18 अक्तूबर 153
17 अक्तूबर 176
16 अक्तूबर 156
15 अक्तूबर 140
14 अक्तूबर 106
विशेषज्ञ सलाह
दीपावली दीपों का पर्व है, लेकिन पटाखों से पर्यावरण को काफी नुकसान होता है। पटाखों से कई प्रकार की खतरनाक गैस निकल कर वायुमंडल में घुल जाती हैं। कार्बन डाइऑक्साइड पर्यावरण के साथ-साथ शरीर को भी नुकसान पहुंचाती है। इसके अलावा कार्बन मोनो ऑक्साइड जहरीली एवं गंध हीन गैस पटाखों से निकलती है, जो हृदय की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचाती है। पटाखों से वायु प्रदूषण के अलावा ध्वनि प्रदूषण भी फैलता है। जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। दीपावली शुभ हो ऐसे प्रयास करें और पर्यावरण को नुकसान नहीं हो इसका ख्याल रखते हुए खुशियों के साथ यह पर्व मनाना चाहिए।
- डॉ. आरसी गुप्ता, पूर्व निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं।