भिवानी। अब टीबी मरीजों के उपचार के साथ-साथ टीबी मुक्त होने वाले गांवों की ग्राम पंचायतों को भी स्वास्थ्य विभाग से प्रोत्साहन मिलेगा। टीबी मुक्त पंचातयों को स्वास्थ्य विभाग प्रमाण पत्र एवं प्रशस्ति पत्र भी देगा। इसी के साथ टीबी मुक्त पंचायत को महात्मा गांधी की कांस्य प्रतिभा भी मिलेगी। ग्राम पंचायत का चयन जिला व राज्यस्तरीय कमेटी के सत्यापन से ही होगा।
भिवानी जिले में 312 गांवों में 61 ग्राम पंचायतों को इस दायरे में शामिल किया गया है। इनमें जिला स्तरीय व राज्य स्तरीय कमेटी के सत्यापन के बाद ग्राम पंचायतों की अंतिम सूची तैयार होगी। भिवानी जिले में हर साल स्वास्थ्य विभाग के समक्ष करीब ढाई हजार से अधिक टीबी संभावित मरीज सामने आते हैं, जिन्हें स्वास्थ्य विभाग दवाओं के साथ-साथ सरकार से मिलने वाली योजनाओं का भी लाभ दे रहा है। फिलहाल भिवानी जिले में 2023 के दौरान 3300 से अधिक टीबी मरीजों का उपचार स्वास्थ्य विभाग में चला और उन्हें दवाइयां भी मुहैया कराई गई। इतना ही नहीं स्वास्थ्य विभाग निजी अस्पतालों में उपचार ले रहे मरीजों में टीबी संभावित मरीजों की जानकारी और उनके इलाज में अच्छे नतीजे देने पर प्रति मरीज एक हजार रुपये प्रोत्साहन भी देगा।
इसके लिए निक्षय पोर्टल पर इनका रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके बाद टीबी मरीज को हर माह पांच सौ रुपये पोषण भत्ता के साथ विभाग दवाइयां भी मुहैया कराएगा। स्वास्थ्य विभाग ने टीबी मुक्त पंचायतों को प्रोत्साहन देने के लिए कुछ मानदंड भी तय किए हैं। जिन्हें पूरा करने वाली ग्राम पंचायतों को ही इस दायरे में लाया जाएगा।
एक हजार जनसंख्या पर 30 मरीजों की बलगम जांच अनिवार्य
स्वास्थ्य विभाग में उप सिविल सर्जन (टीबी) डॉ. सुमन विश्वकर्मा ने बताया कि टीबी मुक्त ग्राम पंचायतों के लिए एक हजार जनसंख्या पर एक या एक से कम मरीज होने चाहिए। इसी तरह उस इलाके में एक हजार लोगों में कम से कम 30 लोगों की बलगम जांच अनिवार्य है। एक जनवरी से 31 दिसंबर 2022 तक 85 फीसदी ट्रिटमेंट सेक्सस रेट होना चाहिए। डीबीटी के तहत पहली निक्षय पोषण का लाभ लेना जरूरी है। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत मरीजों को पोषण कीट दी गई हो। यूनिवर्सल ड्रग्स सेंसिटिविटी टेस्ट भी अनिवार्य है। 2023 के लिए एक साल के टीबी मुक्त ग्राम पंचायत का सर्टिफिकेट दिया जाएगा। इन मापदंडों को पूरा करने वाली ग्राम पंचायतों का ही जिला व राज्य की टीम सत्यापन करेगी। 24 मार्च को उपायुक्त के माध्यम से महात्मा गांधी की कांस्य की महात्मा गांधी की मूर्ति दी जाएगी और स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा। लोगों को टीबी के प्रति जागरूक करने के लिए ये कदम उठाया गया है।
2025 तक देश को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। ग्राम पंचायतों को भी टीबी मुक्त भारत अभियान से जोड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अहम कदम उठाया है। इससे गांव और जिला दोनों को ही टीबी मुक्त बनाने की दिशा में ग्राम पंचायतों की सहभागिता रहेगी और इस लक्ष्य को पूरा करने में अहम योगदान भी मिलेगा। जिलास्तरीय कमेटी में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी और सरपंचों को शामिल किया गया है। जबकि राज्य स्तरीय कमेटी में स्वास्थ्य निदेशालय के अधिकारी शामिल हैं। - डॉ. रघुवीर शांडिल्य, सिविल सर्जन, भिवानी।