भिवानी। कस्बा जूई क्षेत्र के गांव खैरपुरा में मनरेगा के तहत कराए जाने वाले विकास कार्यों में नाबालिग बच्चों के नाम से फर्जी हाजिरी दर्शाकर राशि गबन मामले में हिसार राज्य चौकसी ब्यूरो कार्यालय में एफआईआर दर्ज हुई है। मंगलवार को राज्य चौकसी ब्यूरो कार्यालय में गांव खैरपुरा के पूर्व सरपंच राजबीर सिंह, मनरेगा मैट सुनील कुमार सहित छह के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज हुआ है।
गांव के ही सतेंद्र ने आरटीआई के जरिए सूचना हासिल कर गांव में मनरेगा के नाम पर सरपंच और मनरेगा अधिकारियों की मिलीभगत से राशि गबन मामले का खुलासा किया था। शिकायतकर्ता सतेंद्र की तरफ से मामले की पैरवी कर रहे एडवोकेट संजय श्योराण डाडमा ने बताया कि जून 2010 से जुलाई 2015 तक गांव में राजबीर सिंह सरपंच थे। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान स्कूली बच्चों जो उस समय पांचवीं से नौवीं कक्षा में पढ़ाई कर रहे थे। उनकी मनरेगा में फर्जी हाजिरी दर्शाकर 16 हजार 366 रुपये की सरकारी राशि का गबन कर लिया।
उसने बताया कि सरपंच ने मनरेगा मैट सुनील कुमार से मिलीभगत कर प्रति बच्चा 2338 रुपये की राशि का गबन किया जबकि मनरेगा में छह नाबालिग बच्चों को मजदूरी करते हुए दर्शाया गया है। ये सभी बच्चे ठीक उसी समय अपने-अपने स्कूलों में भी हाजिरी लगाकर पढ़ाई कर रहे थे। इस तरह से धोखाधड़ी कर सरपंच ने मनरेगा राशि में गबन को अंजाम दिया। जिसकी शिकायत जिला उपायुक्त को दी गई थी। जिस पर उपायुक्त ने सरपंच को इस मामले में पहले निलंबित कर दिया था। एडवोकेट संजय श्योराण ने बताया कि शिकायतकर्ता सतेंद्र ने इस मामले में भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज किए जाने की शिकायत भी राज्य चौकसी ब्यूरो को दी थी, लेकिन केस दर्ज नहीं किया था। जिसके बाद सतेंद्र ने स्पेशल जल भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के समक्ष दी। जिस पर न्यायालय के आदेश पर राज्य चौकसी ब्यूरो हिसार थाना में केस दर्ज किए जाने के आदेश दिए गए। जिस पर राज्य चौकसी ब्यूरो हिसार कार्यालय में सतेंद्र की शिकायत पर गांव खैरपुरा के पूर्व सरपंच राजबीर सिंह, मनरेगा मैट सुनील कुमार सहित नाबालिग बच्चों के अभिभावक अजीत सिंह, धर्मबीर, सुरेश और राजेश के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।