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जीवन जीने की कला सिखाती श्रीमद् भागवत कथा : आचार्य

Mon, 23 Sep 2024 06:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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भिवानी के पटेलनगर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में कथा सुनाते  आचार्य विनय मिश्र।
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भिवानी। पटेलनगर स्थित थेपड़ा परिवार की ओर से श्रीकृष्ण छठी पूजन महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। इसके तहत संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा सुनाई जा रही है। इसके चौथे दिन रविवार को कथावाचक आचार्य विनय मिश्रा ने श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा जीवन जीने की कला सिखाती है।
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इस दौरान कृष्ण जन्म का व्याख्यान शुरू होते ही पूरा पांडाल जय हो नंद लाल की-हाथी घोड़ा पालकी से गुंजायमान हो गया। श्रीमद् भागवत कथा के दौरान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव में श्रद्धालु झूमते दिखाई दिए। आचार्य विनय ने कहा कि कारागार में वासुदेव-देवकी के भादो मास की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। उनका लालन-पालन नंदबाबा के घर में हुआ था।
इसलिए नंदगांव में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। श्रीकृष्ण ने अत्याचारी कंस का वध करके पृथ्वी को अत्याचार से मुक्त किया और अपने माता-पिता को कारागार से छुड़वाया। उन्होंने कहा कि जीवन में अच्छे, बुरे दिन प्रभु की कृपा से ही आते हैं। उन्होंने कहा कि जिस समय भगवान कृष्ण का जन्म हुआ, जेल के ताले टूट गए। पहरेदार सो गए। वासुदेव व देवकी बंधन मुक्त हो गए। प्रभु की कृपा से कुछ भी असंभव नहीं है।
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कृपा न होने पर प्रभु मनुष्य को सभी सुखों से वंचित कर देते हैं। इसीलिए जीवन में प्रभु भक्ति बहुत जरूरी है, क्योंकि प्रभु भक्ति ही जीवन का आधार है। विनय ने कहा कि कथा सुनने का लाभ भी कई जन्मों के पुण्य से मिलता है। मनुष्य को जीवन परमात्मा ने दिया है, लेकिन जीवन जीने की कला हमें सत्संग से प्राप्त होती है। इस अवसर पर मनोज थेपड़ा, मनीष थेपड़ा मनोज थेपड़ा, सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश सैनी आदि मौजूद रहे।
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