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नियम 134ए : एसएलसी लेने वाले विद्यार्थियों को मिलेगा पुन: दाखिला

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भिवानी। नियम 134ए के तहत दाखिला लाने के इंतजार में जिन विद्यार्थियों ने अपनी एसएससी कटवाई थी, अब वे अपने पुराने स्कूल में दोबारा दाखिला ले सकते हैं। कोई भी निजी स्कूल उनके एक साल की अतिरिक्त फीस वसूल नहीं कर सकता और न ही कोई स्कूल विद्यार्थियों को दाखिला देने से मना नहीं कर सकता है। अगर कोई सरकारी या निजी स्कूल ऐसा करता है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी और खंड मौलिक शिक्षा अधिकारी को पत्र जारी किया है।
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शिक्षा विभाग की ओर से निजी स्कूलों में निशुल्क दाखिला के लिए नियम 134ए के तहत व्यवस्था अमल में लाई गई थी। इसके तहत निजी स्कूल में पढ़ने वाले आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को निशुल्क शिक्षा देने के लिए टेस्ट लिया गया था, जिसमें पात्र विद्यार्थियों का दाखिला किया गया। कुछ विद्यार्थियों के दस्तावेजों में त्रुटियां और किसी अन्य कारणों से वंचित रह गए, लेकिन इन विद्यार्थियों ने अपने पुराने स्कूल से एसएलसी कटवा ली थी और नए स्कूल में ये दाखिला से वंचित रह गए। ऐसे में कई निजी स्कूलों ने इनके दाखिला फीस सहित पूरी साल की फीस जमा करवाने की शर्त लगाने लगे। जिसको ध्यान में रखते हुए निदेशालय ने पत्र जारी किया है कि कोई भी स्कूल विद्यार्थी से ऐसे एक साल की फीस नहीं ले सकता। दाखिले वाले दिन से ही उसकी फीस शुरू की जानी होगी। साथ ही कोई भी स्कूल अगर विद्यार्थियों को दाखिला देने से मना करता है तो यह भी नियमों के विरुद्ध है। अगर कोई सरकारी या निजी स्कूल ऐसा करता है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लगाई जाएगी।
जिले में 883 विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ
जिले में नियम 134ए के तहत 2184 विद्यार्थियों ने परिक्षा उत्तीर्ण की थी। इनमें से 1289 विद्यार्थियों का दाखिला हो गया, जबकि 895 विद्यार्थियों के दस्तावेजों में त्रुटि होने के कारण फार्म रद्द कर दिए थे। अब ये 895 विद्यार्थी अब अपने पुराने निजी स्कूल या फिर सरकारी स्कूल में दाखिल ले सकते हैं।
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वर्जन
कोई भी निजी या सरकारी स्कूल नियम 134ए के तहत दाखिला से वंचित विद्यार्थियों को दोबारा दाखिला देने से मना नहीं कर सकता। साथ ही निजी स्कूल उनके एक साल की अतिरिक्त फीस वसूल नहीं कर सकता है। इस संबंध में निदेशालय से पत्र मिला है, जिसे तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया है। - रामअवतार शर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, भिवानी।
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