भिवानी। अब शहर में बिना वैज्ञानिक विधि और लाइसेंस के कैंपर सप्लाई नहीं होंगे। जिला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आरओ संचालकों को इस संबंध में नोटिस थमा दिया है। उन्हें या तो लाइसेंस लेकर वैज्ञानिक विधि से पानी शुद्ध करने के मानक पूरे करने हैं या फिर उनके आरओ सिस्टम को ही सील कर दिया जाएगा। नोटिस मिलने के बाद शहर भर में कैंपर सप्लायरों में भी हड़कंप मचा है, उन्हें लाइसेंस लेना है या फिर अपना सिस्टम बंद करना है, इसका निर्णय भी जल्द करना होगा, क्योंकि विभाग ने नोटिस में समय सीमा भी तय कर दी है।
भिवानी शहर में रोजाना ही करीब 55 हजार से ज्यादा कैंपरों की सप्लाई दी जा रही है। अधिकांश पानी के कैंपर सभी व्यवसायिक प्रतिष्ठानों, दुकानों और संस्थानों में भेजे जा रहे हैं। क्योंकि यहां कैंपर के पानी को ही शुद्ध माना जा रहा है। हालांकि दिखाई देने में स्वच्छ इस पानी का स्वाद भी अजीब तरह का है। इससे यह भी संशय बना है कि ये पानी वैज्ञानिक विधि से शुद्ध हुआ है या फिर इसे शुद्ध करने के लिए कोई और तरीका अपनाया जा रहा है। दरअसल मुख्यमंत्री उड़नदस्ते की अन्य विभागों के साथ की गई संयुक्त कार्रवाई के बाद आरओ सिस्टम की सच्चाई उजागर हुई है। जिसकी जांच के बाद पाया गया कि आरओ वाटर कैंपर सप्लाई करने वाले सप्लायरों के पास वैज्ञानिक विधि से पानी शुद्ध करने का न तो लाइसेंस है न ही उनके पास पानी को शुद्ध करने के मानक पूरे हैं। ऐसे में अधिकांश शहर जहरीला पानी ही गटक रहा है, जिसका लोगों की सेहत पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
अधिकांश आरओ सिस्टम भूमिगत पानी तो कुछ पेयजल सप्लाई के पानी को कर रहे हैं ठंडा
आरओ सिस्टम के अंदर वैज्ञानिक विधि से पानी शुद्ध होता है इसकी तो गारंटी नहीं, लेकिन अधिकांश आरओ संचालक भूमिगत पानी का ही इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसके टीडीएस सहित पानी के कुछ मानकों की जांच भी नियमित तरीके से नहीं हो पाती है वहीं कई आरओ सप्लायर पेयजल आपूर्ति के पानी को ही ठंडा कर सप्लाई कर रहे हैं। अलग-अलग आरओ के पानी का अलग-अलग स्वाद है। जिससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि ये पानी पीने के बाद सेहत के लिए कितना फायदेमंद होगा।
विशेषज्ञ बोले
पानी की शुद्धता का सबसे अच्छा तरीका तो उसे उबालकर ठंडा कर पीना है। लेकिन आजकल सबसे अधिक चलन कैंपर का हो गया है। इसका स्वाद भी लोगों को भा रहा है। आरओ से फिल्टर करते समय पानी के कुछ जरूरी तत्व नष्ट हो जाते हैं। पानी में जब तक सभी पैरामीटर पूरे नहीं होंगे, उसके सेवन से शरीर के अंदर उन सभी तत्वों की पूर्ति नहीं कर पाएगा। आरओ का पानी वैज्ञानिक विधि से शुद्ध नहीं किया जा रहा है तो निश्चित रूप से इस पानी को शुद्ध नहीं कहा जा सकता है, क्योंकि उसके अंदर सभी पैरामीटर पूरे नहीं है। ऐसे में ये पानी सेहत के लिए हानिकारक होगा और इससे कई तरह के नए विकार भी शरीर में पैदा होंगे। -डॉ. यतिन गुप्ता फिजिशियन जिला नागरिक अस्पताल भिवानी।
मुख्यमंत्री उड़नदस्ते की टीम ने संयुक्त रूप से आरओ वाटर कैंपर सप्लायरों के प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की थी, जिनमें वैज्ञानिक विधि से पानी को शुद्ध नहीं किया जा रहा था। उनके पास मानक भी पूरे नहीं थे, इसलिए उन्हें जिला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से नोटिस जारी किया है। उन्हें स्पष्ट हिदायतें दी गई हैं कि या तो वैज्ञानिक विधि से पानी शुद्ध करने के मानक अपनाकर निर्धारित लाइसेंस लें या फिर उनके आरओ सिस्टम को सील कर दिया जाएगा। -शक्ति सिंह क्षेत्रीय अधिकारी जिला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भिवानी।
अब भिवानी में बिना वैज्ञानिक विधि और लाइसेंस के कैंपर सप्लाई नहीं होंगे।