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Bhiwani News: दूसरे दिन भी तहसील कार्यालय में रजिस्ट्री और लाइसेंस का काम भी ठप

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लिपिक कर्मचारियों की हड़ताल के कारण ​भिवानी तहसील कार्यालय में रजिस्ट्री नहीं होने पर दस्तावेज
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भिवानी। जिलेभर के लिपिकों ने वीरवार को हड़ताल के दूसरे दिन भी लघु सचिवालय के बाहर अनिश्चितकालीन हड़ताल स्थल पर डेरा डाले रखा। वहीं सरकारी विभागों में दूसरे दिन भी कामकाज की व्यवस्था बिगड़ी रही। भिवानी सहित उपमंडल तहसील कार्यालयों में भी रजिस्ट्रियां नहीं हुई और चालक लाइसेंस का काम भी ठप रहा।
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लिपिक कर्मचारियों ने सरकार को चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होती वे हड़ताल जारी रखेंगे। सरकारी कार्यालयों में दूसरे दिन भी कौशल कर्मियों ने मोर्चा संभाले रखा। भिवानी तहसील कार्यालय में रजिस्ट्री के टोकन दिखाते हुए हालुवास निवासी आशा रानी, कुंगड़ निवासी भूप सिंह, कुंगड़ कर्म सिंह, मुनेश, दादरी गेट निवासी अनिल ने कहा कि उसने रजिस्ट्री कराने के लिए टोकन कटवाए थे, लेकिन रजिस्ट्री क्लर्क नहीं होने की वजह से उनकी रजिस्ट्री का काम नहीं हुआ। वहीं तहसील कार्यालय में तैनात कर्मचारियों ने बताया कि रोजाना यहां सौ टोकन काटे जा रहे हैं, मगर बुधवार को काटे गए सौ टोकन कैंसिल हो गए और रजिस्ट्री नहीं हुई।
लिपिक वर्गीय कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से राजस्व विभाग को भी लाखों के राजस्व का नुकसान हो रहा है। प्रत्येक रजिस्ट्री पर स्टॉप के अलावा सरकारी फीस भी आती हैं, मगर दो दिन से तहसील कार्यालय में कोई कामकाज नहीं हो रहा है। वहीं एसडीएम ऑफिस में भी लाइसेंस का कामकाज ठप पड़ा है। सरल और ई दिशा केंद्र में कौशल निगम के तहत लगे कर्मचारी ही लोगों के ऑनलाइन आवेदन व मामलों के निपटान में लगे रहे। लेकिन पुराने मामलों में क्लर्क की जरूरत पड़ने पर काफी मामले भी अटक गए।
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सरकारी विभागों में आधे कर्मचारी रहे मौजूद

सरकारी विभागों में क्लर्कों की हड़ताल के बाद करीब आधे कर्मचारी ही मौजूद रहे। कर्मचारियों की कुर्सी खाली होने से लोग भी अपने जरूरी कामकाज के लिए सरकारी विभागों में चक्कर लगाकर वापस लौट गए। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, सिंचाई विभाग, बिजली निगम, स्वास्थ्य विभाग के अलावा अनेक सरकारी विभागों के कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए।
जब तक सरकार लिपिक वर्गीय कर्मचारियों की जायज मांगे पूरी नहीं करती आंदोलन जारी रखा जाएगा। हड़ताल से पहले भी सरकार को मांगों का अल्टीमेटम दिया गया था, मगर सरकार ने न तो मांगे पूरी की न ही उन्हें कोई जवाब एवं आश्वासन दिया। मजबूर होकर कर्मचारियों को ये कदम उठाना पड़ा। कर्मचारी किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेंगे।
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-नेत्रपाल, अध्यक्ष, काऊज कोर कमेटी।
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