भिवानी। हरियाणवी भाषा विकास मंच के अध्यक्ष हरियाणवी कवि साहित्यकार डाॅ. वीएम बेचैन के साथ अन्य साहित्यकारों ने हरियाणवी बोली को भाषा का दर्जा दिए जाने की मांग को उठाया। इसको लेकर मुख्यमंत्री के नाम विधायक घनश्याम सर्राफ को ज्ञापन सौंपा।
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विधायक ने साहित्यकारों को आश्वासन दिया है कि वे मुख्यमंत्री से मिलकर इस दिशा में अवश्य सकारात्मक कदम उठावाएंगे। इस अवसर पर साहित्यकार डाॅ. बिजेन्द्र गाफिल, विनोद आचार्य और डाॅ. महेंद्र सिंह सागर विशेष रूप से मौजूद थे।
ज्ञापन के माध्यम से डाॅ. बेचैन ने प्रदेश के अन्य विद्वानों एवं साहित्यकारों की ओर से विनम्रतापूर्वक सरकार से अनुरोध किया है। हरियाणा दिवस पर मुख्यमंत्री यदि चाहे तो हरियाणवी भाषा विकास आयोग का गठन करने की घोषणा कर सकते हैं। बाद में तय निश्चित अवधि के लिए विद्वानों की एक टीम को यह कार्य सौंप सकते हैं कि वे हरियाणवी बोली में भाषा बनने की तमाम संभावनाओं पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
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उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार ने अब तक हरियाणवी भाषा के प्रति न तो अपनी आस्था जताई है और न ही देश दुनिया में अलग पहचान बनाने वाली संस्कारों की इस बोली के उत्थान एवं विकास के बारे में सोचा है। उन्होंने कहा कि आयोग द्वारा पेश की गई रिपोर्ट के आधार पर ही संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने संबंधी ठोस कदम उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह हरियाणा दिवस प्रदेश सरकार के साथ इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो सकता है। यदि मुख्यमंत्री हरियाणवी बोली के प्रति गंभीरता दिखाते हुए। हरियाणवी भाषा विकास आयोग के गठन की घोषणा कर देते है।