बहल। लंबे इंतजार के बाद जैसे ही पंचायत चुनावों की घोषणा हुई तो गांव की नई सरकार बनाने की तैयारियां तेज हो गई है। एक ओर लोगों को पिछले करीब 24 महीने से लगे समस्याओं के अंबार से निजात मिलने की उम्मीद जग गई है। वहीं उनको ऐसे चेहरे को चुनने की माथापच्ची हो गई है जो अगले पांच साल के लिए गांव में विकास के काम करवा सके।
लोगों की सोच है कि आने वाला सरपंच ऐसा बने जो शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन जैसी सेवाओं में सुधार और विकास करवा सके। बहल कस्बे में जब इस तरह की चुनावी चर्चा सुनी गई तो सबसे बड़ी समस्या कस्बे में बस स्टैंड, अस्पताल और सफाई व्यवस्था की जानने को मिली। लोगों ने कहा कि इतना बड़ा बहल कस्बा है लेकिन यहां सरकारी स्वास्थ्य सेवा न के बराबर है। अस्पताल तो है पर उसमें न पूरे चिकित्सक है, न दवाइयां है। लोगों को केवल टीकाकरण तक की ही सेवा मिल रही है। जबकि करीब 15 हजार की जनसंख्या और करीब आठ हजार मतदाता वाले कस्बे में चिकित्सा की सभी सुविधा मिलनी चाहिए। लोगों का कहना है कि एक्स रे, लेबोरेट्री, डिलीवरी के अलावा सामान्य रोग, बाल रोग एवं महिला विशेषज्ञ की नियुक्ति होनी चाहिए ताकि लोगों को सुविधा मिल सके।
वहीं, कुुछ लोगों का कहना है कि ऐसा व्यक्ति सरपंच बने जो बहल में लोगों की सुविधा के लिए विकास कार्य करवाएं। इनमें बहल को उपमंडल का दर्जा दिलाने, बस स्टैंड बनवाने के लिए अलावा अन्य विकास कार्य करवाएं ताकि बहल का नाम विकसित कस्बों में शुमार हो सके। इसके अलावा कस्बे में सफाई व्यवस्था सुचारू हो। परिचर्चा में शामिल हरफूल खन्ना, मनीष चौधरी, सुनील शर्मा, रवि जावला, जयपाल जावला व सहित अन्य लोगों ने कहा कि बहल में सरपंच पद के लिए चुनाव बहुत सोच समझकर करना है ताकि बहल कस्बे को अगले पांच साल के लिए सही विकास हो सके।
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अरसे पहले गरीब लोगों को 100-100 गज के प्लाट दिए जाने का वादा किया गया था। पर, आज तक बहुत से लोगों को प्लाट नहीं मिले हैं। इसके अलावा बहुत सी ऐसी योजनाएं है जिनका गरीब लोगों तक सही फायदा नहीं पहुंच पा रहा है। सरपंच चुनाव में इन सब बातों को ध्यान में रखकर ही चुनाव किया जाना सही होगा।
-रोहताश जावला, बहल।
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बहल में बहुत सी समस्याएं हैं जिससे लोगों को आए दिन परेशानी का सामना करना पड़ता है। एक बड़ी समस्या कस्बे से पानी की निकासी की है। थोड़ी सी बरसात में अनेक जगहों पर पानी का तालाब बना जाता है। खासकर कन्या विद्यालय के सामने जलभराव के कारण बहुत ज्यादा परेशानी हो रही है। उम्मीद है कि नई पंचायत में इन समस्याओं से निजात मिलेगी।
-ललित शर्मा, बहल।
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पिछले करीब दो साल से पंचायत का गठन नहीं होने से कस्बे में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। अब जो भी सरपंच बने वो शिक्षित हो, समझदार हो, ईमानदार हो और बिना किसी भेदभाव के पूरे कस्बे का समान विकास करवाने वाला हो।
-सुनीता लांबा, बहल।
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मेरा यह पहला वोट होगा। मैं किसी जाति, पाति, धर्म के नाम पर या किसी चित परिचित के कहने से अपना वोट किसी को नहीं दूंगा। मुझे अपने वोट देने से पहले उम्मीदवार का चयन करना है जो मेरी कस्बे के विकास को लेकर जो उम्मीदें हैं, उन पर पूरा उतर सके। मेरी इच्छा है कि मेरा वोट जीत में जाए और मेरा वोट मेरे कस्बे के विकास का भागीदार बने।
-अजय सोनी, मतदाता।