भिवानी जिले की एक नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश पर महिला पुलिस थाना की ओर से कराई गई ब्रेन मैपिंग (पॉलीग्राफ टेस्ट) की रिपोर्ट आ गई है। इसमें पीड़िता के साथ-साथ दोनों आरोपियों का पॉलीग्राफ टेस्ट कराया गया था। इस रिपोर्ट में पीड़िता की ओर से लगाए गए आरोप सही पाए गए हैं। वहीं आरोपियों की पॉलीग्राफ रिपोर्ट में चार सवाल किए जाने पर उनकी धड़कन और बीपी बढ़ने की रिपोर्ट दी है।
महिला पुलिस थाना की एसएचओ की ओर से पॉलीग्राफ टेस्ट की रिपोर्ट हाईकोर्ट में दाखिल कर दी गई है। इसके बाद अब मामले की अगली सुनवाई 18 दिसंबर को निर्धारित हुई है। भिवानी जिले के जूई कलां क्षेत्र के एक गांव की नाबालिग के साथ सामूहिक रूप से दुष्कर्म मामले में सात नवंबर 2022 को महिला पुलिस थाना भिवानी में केस दर्ज हुआ था। पीड़िता ने महिला पुलिस थाना में दी शिकायत में दुष्कर्म के आरोप अपने ही मौसा और उसके भाई पर लगाए थे।
पीड़िता ने पुलिस को दर्ज कराए बयान में बताया था कि 2018 में वह स्कूल की छुट्टियों के दौरान अपनी मौसी के घर आई थी। उसके मौसा ने उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया और किसी को कुछ बताने पर जान से मारने व बदनाम करने की धमकी दी। इसके बाद उसने ये बात मौसा के भाई को बताई। इसके बाद मौसा के भाई ने भी उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया।
पीड़िता ने आरोप लगाया कि 2018 से लेकर 2022 तक दोनों आरोपियों ने उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया। उसके परिवार को भी जान से मारने की धमकी दी। इस मामले में महिला पुलिस थाना ने पीड़िता की शिकायत पर सात नवंबर 2022 को दो आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। मामला पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में पहुंचा और पीड़िता की ओर से हाईकोर्ट में एक शपथ पत्र देकर उसका व दोनों आरोपियों का पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की गुहार लगाई।
न्यायालय ने सामूहिक दुष्कर्म के दोनों आरोपियों व पीड़िता की ब्रेन मैपिंग कराए जाने के लिए पॉलीग्राफ टेस्ट कराने के आदेश दिए। भिवानी पुलिस द्वारा कराए गए तीनों के पॉलीग्राफ टेस्ट की रिपोर्ट आ गई। छह पेज की पॉलीग्राफ रिपोर्ट में चार सवाल आरोपियों से पूछे गए। इस दौरान उनकी दिल की धड़कन और बीपी बढ़ने की रिपोर्ट दर्ज की गई और रिपोर्ट निगेटिव आई, जबकि पीड़िता ने सभी सवालों के जवाब में सामान्य स्थिति बनी रही और रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इस रिपोर्ट में आरोपियों पर पीड़िता द्वारा लगाए गए आरोप सही मिले हैं।
क्या है ब्रेन मैपिंग टेस्ट
अपराध की जांच के सिलसिले में ब्रेन मैपिंग टेस्ट ऐसी जांच प्रक्रिया है, जिसके तहत आरोपी के मस्तिष्क की हलचलों की छवियों के जरिये उसके दोषी होने का पता लगाया जाता है। इस टेस्ट में अभियुक्त को कंप्यूटर से जुड़ा एक हेलमेट पहनाया जाता है, जिसमें कई सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगे होते हैं। जांच के दौरान फोरेंसिक विशेषज्ञ आरोपी को अपराध से जुड़ी वस्तुओं के चित्र दिखाते या कुछ ध्वनियां सुनाते हैं और उन पर आरोपी के मस्तिष्क की प्रतिक्रिया का निरीक्षण कर उसकी संदिग्धता का पता लगाते हैं। सेंसर मस्तिष्क की गतिविधियों को मॉनिटर करता है और तरंगों को अंकित करता है। ये तरंगें तभी पैदा होती हैं, जब आरोपी का उन चित्रों और ध्वनियों से कोई संबंध होता है। निर्दोष आरोपी अपराध से जुड़ी ध्वनियों और चित्रों को पहचान नहीं पाते, जबकि संदिग्ध उन्हें पहचान लेते हैं।
नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर कराई गई पॉलीग्राफ रिपोर्ट आ चुकी है। जिसे भिवानी पुलिस की ओर से पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में दाखिल किया जा चुका है। इस मामले में हाई कोर्ट में अब अगली सुनवाई 18 दिसंबर को होगी।
-धर्मली देवी, एसएचओ महिला पुलिस थाना भिवानी।