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जल-जमीन और जीवन को बचाने के लिए जहर मुक्त प्राकृतिक खेती को अपनाना होगा : आचार्य देवव्रत

Thu, 23 Mar 2023 11:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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भिवानी। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि केवल प्राकृतिक खेती को अपनाकर ही जल,जमीन और जीवन के साथ-साथ किसान को बचाया जा सकता है। इसके लिए देसी गाय के गोबर व गोमूत्र से बनी खाद का प्रयोग करें। इसी खाद से धरती को सूक्ष्म जीव मिलते हैं, जिनको हमने रासायनिक खाद के प्रयोग से खत्म कर दिया है। सूक्ष्म जीव ही प्राकृतिक खेती का आधार है।
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गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत वीरवार को राधा स्वामी सत्संग दिनोद के संत कंवर महाराज के सानिध्य में भिवानी में रोहतक रोड स्थित राधा स्वामी भवन में जन कल्याण, जहर मुक्त प्राकृतिक खेती एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए आयोजित कार्यक्रम में आश्रम के अनुयायियों को प्राकृतिक खेती अपनाने का संदेश दे रहे थे। गुजरात के राज्यपाल देवव्रत और संत कंवर महाराज ने करीब 15 हजार से अधिक अनुयायियों को प्राकृतिक खेती अपनाने की शपथ दिलाई।
गुजरात के राज्यपाल देवव्रत ने कहा कि राधा स्वामी सत्संग से जुड़े अनुयायी अब तक सदाचार जीवन जीने, नशा मुक्ति, मांसाहार को त्यागने, चोरी न करना व कन्या भ्रूण हत्या न करने जैसे पांच नियमों का पालन करते रहे हैं। आज से संत कंवर महाराज ने अपने अनुयायियों को जो प्राकृतिक खेती अपनाने का संकल्प दिलाया है, वह अपने आप में मानव कल्याण के लिए वरदान होगा।
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उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में खेती में रासायनिक खादों के प्रयोग से खानपान जहरीला हो जा रहा है। इससे हम कैंसर व हार्टअटैक जैसी अनेक जानलेवा बीमारियों की गिरफ्त में आ रहे हैं। आचार्य देवव्रत ने कहा कि वे स्वयं अपने कुरुक्षेत्र गुरुकुल की 200 एकड़ भूमि पर खेती में प्राकृतिक खेती करते हैं। उन्होंने कहा कि पौधे को पानी की नहीं केवल नमी की जरूरत होती है, जो प्राकृतिक ढंग से मिल जाती है, जैसे जंगलों में पौधों को मिलती है।
प्राकृतिक खेती से वाटर लेवल भी ऊपर आएगा। उन्होंने बताया कि एक गाय के एक ग्राम गोबर से 300 करोड़ सूक्ष्म जीवाणु पैदा होते हैं और एक किलोग्राम गोबर से 30 लाख करोड़ सूक्ष्म जीवाणु पैदा हो जाते हैं। उन्होंने समझाया कि करीब 200 लीटर का एक ड्रम लें, उसमें 170 से 180 लीटर पानी डालें और फिर से उसमें एक दिन का गोबर डाल दें, उसमें डेढ़ से दो किलो गुड़, डेढ़ से दो किलो दाल का बेसन, पेड़ के नीचे की एक मुट्ठी मिट्टी डाल दें। सुबह-शाम चार से पांच मिनट तक उसको किसी डंडे से हिलाएं। सर्दी में छह दिन और गर्मी में चार दिन तक रखें। इसके बाद यह घोल जीवामृत बन जाएगा। यह एक एकड़ की खाद तैयार होगी, इसको खेती में पानी देते समय पानी के साथ छोड़ सकते हैं।
हिमाचल में दो लाख किसानोंं को प्राकृतिक खेती से जोड़ा
आचार्य देवव्रत ने कहा कि हिमाचल प्रदेश का गवर्नर रहने के दौरान मात्र चार साल में वहां के दो लाख किसानों को प्राकृतिक खेती के साथ जोड़ा, जिसमें वहां की महिलाओं का सबसे बड़ा योगदान रहा है।
जैसा खाएंगे अन्न-वैसा ही होगा मन: कंवर महाराज
संत कंवर महाराज ने संदेश दिया कि हम जैसा अन्न लेते हैं, वैसा ही हमारा मन हो जाता है। मांसाहार व्यक्ति हिंसक प्रवृत्ति का होता है, जबकि सात्विक आहार वाला व्यक्ति शांत मन और संस्कारवान होता है। उन्होंने कहा कि खानपान जहरीला होने से इंसान क्रोधित प्रवृत्ति का हो गया है। इसके साथ ही बीमारियों के जकड़ने से अल्प आयु में ही मौत होने लग गई है।
ये रहे मौजूद
इस मौके पर जवाहर मिताथलिया, बृजलाल सर्राफ, सुरेश गुप्ता, ठा. लाल सिंह, शिवरत्न गुप्ता, ठा. विक्रम सिंह, नंदराम धानिया, ओपी नंदवानी, दीवान चंद रहेजा, कमल प्रधान, अशोक बुवानीवाला, राजकुमार डुडेजा, डॉ. आरबी गोयल, बबीता तंवर, प्रो. सिहाग, विनोद मिर्ग, भानू प्रकाश, संजय कामरा, विनोद गाबा, सतीश मिताथलिया व जिला प्रशासन की तरफ से एसडीएम संदीप अग्रवाल, तहसीलदार आदित्य रंगा, सीआईडी इंचार्ज सुनील कुमार मौजूद रहे।
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