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Bhiwani News: अब मंडियों में उठान से लेकर सरसों के गोदाम पहुंचने तक गाड़ी की लोकेशन को ट्रैक करेंगे कार्यालय में बैठे अधिकारी

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संजय वर्मा
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भिवानी। अब मंडियों में उठान होने से लेकर सरसों के सरकारी गोदामों में पहुंचने तक गाड़ी की लोकेशन को कार्यालय में बैठे अधिकारी जीपीएस सिस्टम से ट्रैक कर निगरानी रखेंगे। वहीं अड़चनों से घिरे ढुलाई के टेंडर को मुख्यालय ने अभी तक मंजूरी नहीं दी है। जबकि मंडियां सरसों की आवक होने से अटने लगी हैं।
सोमवार से मंडियों में गेहूं की आवक भी शुरू हो जाएगी। जबकि ढुलाई ठेकेदारों के रेट तय नहीं होने की वजह से खरीद हो चुकी सरसों का भी अब उठान नहीं होगा। ऐसे में मंडियों में नए आने वाले किसानों के लिए मुश्किलें बढ़ेंगी। भिवानी से खरीद होने वाली सरसों भी इस बार दूरदराज के जिलों के सरकारी गोदामों में लदान कराकर भेजी जाएगी। जिनमें मुख्यत: हिसार, रोहतक, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ शामिल हैं।
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भिवानी जिले सहित प्रदेश के सभी जिलों में सरसों की आवक अब तेज होने लगी हैं। अकेले भिवानी में अब तक 5,252 किसान अपनी 78,779 क्विंटल सरसों मंडियों में ला चुके हैं, जिसमें से 41 हजार क्विंटल की हैफेड ने सरकारी खरीद भी कर दी है। लेकिन अभी तक उठान एक कट्टे का भी नहीं हुआ है। इसकी वजह ढुलाई के टेंडर की अड़चनें अभी तक दूर नहीं हुई हैं। दरअसल गेहूं और सरसों की सरकारी खरीद में ढुलाई टेंडर की प्रक्रिया अक्तूबर में ही शुरू हो गई थी। नौ अक्तूबर को टेंडर कराए तो मानक पूरे नहीं हुए।
इसके बाद 16 मार्च को फिर टेंडर कराए। टेंडर तो हो गए, लेकिन मुख्यालय ने अभी तक रेट तय कर ठेकेदारों को ढुलाई के टेंडर को मंजूरी नहीं दी। ऐसे में अब मंडियां आवक के साथ ही सरसों के ढेरियों और कट्टों से भरने लगी हैं। जबकि गेहूं आना भी अब शुरू हो जाएगा। उठान को लेकर अभी तक असमंजस बना है, क्योंकि टेंडर मंजूर होते हैं तो ठेकेदारों की औपचारिकता पूरी करने में ही एक पखवाड़ा निकल जाएगा।


अब ढुलाई ठेकेदार की हर गाड़ी पर एक विशेष कंपनी का होगा जीपीएस सिस्टम
ढुलाई ठेकेदारों की मंडियों से किसानों की सरकारी खरीद की गई फसलों को सरकारी गोदामों तक पहुंचाने में इस्तेमाल होने वाली प्रत्येक गाड़ी में एक विशेष कंपनी का जीपीएस सिस्टम अनिवार्य कर दिया है। ये कंपनी भी सरकार ने निर्धारित कर दी है। इसके अलावा किसी दूसरी कंपनी के जीपीएस सिस्टम को मान्यता नहीं दी जाएगी और बिना जीपीएस गाड़ी में ढुलाई कार्य नहीं होगा। इस जीपीएस सिस्टम के जरिए ही कार्यालय में बैठे अधिकारी कंप्यूटर से मंडियों से निकली प्रत्येक गाड़ी की लोकेशन को भी लगातार ट्रैक करेंगे। अगर मंडी से निकलने के बाद गाड़ी सीधी गोदाम में नहीं जाती है तो इस पर भी ढुलाई ठेकेदार से जवाब तलब होगा।

हरियाणा सरकार इस बार सरकारी खरीद शुरू होने के बावजूद ढुलाई के रेट तय नहीं कर पाई है। ढुलाई ठेकेदारों पर एक विशेष कंपनी के जीपीएस सिस्टम को गाड़ियों में लगवाने की शर्त थोपी गई है, जिससे ठेकेदारों पर प्रत्येक गाड़ी पर सात से आठ हजार रुपये का अतिरिक्त खर्च बढ़ेगा। ये अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया है, जबकि ढुलाई ठेकेदारों की गाड़ियों में पहले से ही जीपीएस मौजूद है, उसे मान्य नहीं किया जा रहा है। अभी तक ठेकेदारों के रेट और मंडियां तय नहीं होने से सिक्योरिटी राशि भी जमा नहीं कराई है वहीं मंडियों का माल भी दूर-दराज के इलाकों के गोदामों में पहुंचाया जाना है। सरकार की इस नीति से किसान, आढ़ती और ढुलाई ठेकेदारों की परेशानी बढ़ गई है।
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-विजय बंसल टैनी, सरकारी ट्रांसपोर्ट कांट्रेक्टर।
सरसों की सरकारी खरीद चल रही है, सोमवार से गेहूं की खरीद भी आरंभ कर दी जाएगी। ढुलाई कार्य के मंडी वाइज टेंडर कराए जा चुके हैं, जल्द ही मुख्यालय से इसकी मंजूरी भी आ जाएगी। ट्रांसपोर्टरों की गाड़ियों में एक निर्धारित कंपनी का जीपीएस सिस्टम को अनिवार्य किया है। खरीद को लेकर किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं आने दी जाएगी।
-प्रदीप कौशिक डीएफएसओ भिवानी।
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