बहल (भिवानी)। प्रदेश सरकार की ओर से पेश किए गए वार्षिक बजट में जिले में जिन विकास योजनाओं की सौगात मिली है। उनमें बहल क्षेत्र के गोकलपुरा गांव में खुलने वाला पोषक अनाज अनुसंधान केंद्र भी शामिल है। इस केंद्र में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार की देखरेख में कृषि वैज्ञानिक इस क्षेत्र की मुख्य पैदावार में शामिल मोटे अनाजों पर अनुसंधान करेंगे और किसानों को मोटे अनाज की खेती के लिए प्रशिक्षण देंगे।
लोगों का कहना है कि यह केंद्र किसानों की उन्नति और प्रगति के द्वार खोलेगा। बहल कस्बे से करीब तीन किमी दूर गोकलपुरा गांव के मकड़ाना जोहड़ में बनने वाले इस केंद्र पर करीब 54 करोड़ रुपये की लागत आएगी। यह केंद्र 63 एकड़ भूमि में बनेगा। इस केंद्र में एक आवासीय भवन, क्षेत्रीय केंद्रीय परिसर का एक भवन व किसान छात्रावास का निर्माण किया जाएगा। इसमें देश के नामी आईआईएम हैदराबाद, सीएफटीआरआई मैसूर व सीआईटीएचईटी लुधियाना जैसे उन्नत कृषि संस्थानों के वैज्ञानिक केंद्र में मोटे अनाज के अनुसंधान में हिस्सा लेकर मोटे अनाज के बेहतर उत्पादन के लिए उन्नत किस्मों को विकसित करेंगे। बहल, सिवानी, लोहारू व तोशाम जैसे क्षेत्र के किसानों के लिए यह केंद्र वरदान साबित होगा क्योंकि इस क्षेत्र में मोटे अनाज की फसलें ही किसान के लिए आजीविका का साधन है।
गोकलपुरा में जो अनुसंधान केंद्र खोला है, उससे भिवानी जिले के अलावा पूरे दक्षिण हरियाणा की उन्नति होगी क्योंकि इस क्षेत्र में ही प्रदेश में सबसे ज्यादा मोटा अनाज पैदा होता है।
- अजय श्योराण, बिधनोई।
इस केंद्र से किसानों को मोटे अनाज की खेती में नए तौर तरीकों की जानकारी मिलेगी और उन्नत किस्म के बीज व अन्य साधनों से मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा मिलेगा। केंद्र से किसानों को फसलों की पैदावार की बेहतरीन जानकारी मिल सकेगी।
- सुनील सांगवान, सिरसी।
सरकार का प्रयास है कि प्रदेश में ऐसी योजनाएं लागू हो जिससे किसान और खेती उन्नत हो। बहल में बनने वाले पोषक अनुसंधान केंद्र, गरवा में एक्वा एक्सीलेंस सेंटर, खरखड़ी व गिगनाऊ के बागवानी केंद्र सहित अनेक योजनाएं है जिनके पूरा होने पर लोहारू का किसान प्रदेश के अग्रणी किसानों में शामिल होगा।
- जयप्रकाश दलाल, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, हरियाणा