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नर्सिंग दिवस विशेष: 40-40 मरीजों को संभाल रही एक-एक स्टाफ नर्स

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भिवानी। स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार तो एक स्टाफ नर्स के कंधों पर सिर्फ छह मरीजों की देखभाल का जिम्मा रहता है, मगर नागरिक अस्पताल में हकीकत की बात करें तो एक-एक नर्स 35 से 40 मरीज संभाल रही हैं। स्टाफ नर्स मरीजों को दवा, इंजेक्शन, फाइल तैयार करना, सही ढंग से बैड से लेकर वार्ड में सफाई करवाने की जिम्मेदारी संभाले है। वार्ड व आपातकालीन विभाग में दाखिल मरीज व उनके तीमारदार कई दफा स्टाफ के साथ झगड़ा भी कर लेते है, जिन्हें समझाने का कार्य भी स्टाफ नर्स और नर्सिंग सिस्टर (नर्सिंग ऑफिसर) की कर रही हैं। स्वास्थ्य विभाग जहां चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर स्टाफ नर्स और नर्सिंग सिस्टर की पोस्टिंग का भी टोटा है, जिसकी वजह से अस्पताल में कार्यरत स्टाफ के कंधों पर ही उपचार का भार आ रहा है। कोरोना काल में भी स्टाफ नर्स पीछे नहीं हटी और अपनी जिम्मेवारी पूरी तरह निभाई।
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फॉर्मासिस्ट की हड़ताल पर थामी दवा वितरण की कमान -
कुछ माह पहले अपनी मांगों को लेकर फॉर्मासिस्टों ने हड़ताल कर दी थी। हड़ताल के दौरान फार्मासिस्टों ने अस्पताल में दवा वितरण करने से माना कर दिया था, जिसकी वजह से मरीजों का काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। मरीज दवा के लिए घंटों ओपीडी में ही इंतजार करते रहे, जिसकी सूचना मिलने पर सीनियर नर्सिंग ऑफिसर, नर्सिंग ऑफिसर सहित स्टाफ नर्स अस्पताल की ओपीडी और आपातकालीन विभाग में अतिरिक्त ड्यूटी करने के लिए पहुंची और उन्होंने दवा वितरण की कमान संभाली। नर्सों के इस जज्बे को उन दिनों हर किसी ने सलाम किया।
कोरोना काल में बनानी पड़ी परिवार से दूरी -
कोरोना संक्रमण की तीनों लहरों में स्टाफ नर्सों की अहम भूमिका रही है। मरीज की देखभाल से लेकर उन्हें दवा देने का कार्य इन्हीं के कंधों पर था। आठ घंटे कोरोना संक्रमित मरीजों के साथ रहने के कारण स्टाफ नर्सों को मजबूरी में अपने ही परिवार से दूरी बनानी पड़ी। बच्चों, बुजुर्गों सहित परिवार के अन्य सदस्यों के स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए खुद को घर में ही अलग कमरे में आइसोलेट कर लिया था। उस दौरान वे सिर्फ वीडियो कॉल के माध्यम से ही बच्चों से बातचीत करती थी, जोकि काफी कठिन दौर था।
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नर्सिंग सिस्टर और स्टाफ नर्स के खाली पदों की जानकारी -
जिले के नागरिक अस्पताल और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी व पीएचसी) पर कुल 266 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 140 पोस्ट रिक्त है। वहीं नर्सिंग सिस्टर के 26 पोस्टों में से 14 पोस्ट रिक्त है। ऐसे में अधिकतर पोस्ट खाली होने के कारण काम का बोझ अन्य नर्सिंग सिस्टर व स्टाफ नर्स पर जा रहा है। नागरिक अस्पताल में स्टाफ नर्स के 143 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 73 पद पर स्टाफ नर्स तैनात हैं और 70 पद रिक्त हैं। वहीं, नर्सिंग सिस्टर के नागरिक अस्पताल में 16 स्वीकृत पद है, जिनमें से 8 पर नर्सिंग सिस्टर कार्यरत है, जबकि आठ रिक्त है। इसी तरह जिले के ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों पर स्टाफ नर्स के कुल 123 पद हैं, जिनमें से 69 पर स्टाफ नर्स कार्यरत है और 56 पद खाली हैं। वहीं ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में नर्सिंग सिस्टर के 10 पदों में से छह पर नर्सिंग सिस्टर कार्यरत है, जबकि चार पद खाली है।
कोरोना काल में स्टाफ नर्सों ने की बेहतरीन सेवा : सीनियर नर्सिंग ऑफिसर
सीनियर नर्सिंग ऑफिसर सरला ने बताया कि कोरोना संक्रमण के दौरान जिले में हालात काफी नाजुक थे। इस दौरान नागरिक अस्पताल सहित अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात नर्सिंग सिस्टर और स्टाफ नर्सों ने कोरोना संक्रमितों की बेहतरीन सेवा की। उन्होंने अपने स्वयं और परिवार की चिंता भूलकर मरीजों की सेवा में ही अपना पूरा समय दिया। कोरोना के दौरान काफी नर्स खुद भी संक्रमित हुई थी। संक्रमण की रिकवरी के बाद वे फिर से बिना किसी डर के अपनी ड्यूटी पर आई, जोकि काफी सहरानीय व प्ररेणादायी रहा।
वर्जन :
अस्पताल में स्टाफ नर्स, चिकित्सक सहित अन्य स्टाफ के भी काफी पद रिक्त है। खाली पदों पर स्टाफ की नियुक्ति करने के लिए स्वास्थ्य निदेशालय को पत्र लिखा है। उम्मीद है जल्द ही स्टाफ पुरा होगा, जिसके बाद स्वास्थ्य सेवाएं ओर अधिक बेहतर होंगी। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए स्वास्थ्य विभाग निरंतर कार्य कर रहा है।
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- डॉ. एडविन, प्रधान चिकित्सा अधिकारी।
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