प्रदेश सरकार के आदेश पर भावांतर भरपाई योजना में करोड़ों रुपयों का घोटाला उजागर होने के बाद अब मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल में कई खामियों को दूर करते हुए उसे अपडेट किया गया है। अब खेत मालिक के बिना मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन संभव नहीं होगा।
पहले कोई भी अपने मोबाइल फोन से काश्तकार कॉलम में पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करा सकता था, जिसमें भूमिहीन लोगों के नाम से भी पोर्टल पर सैकड़ों फर्जी रजिस्ट्रेशन दर्ज कर फर्जीवाड़ा किया गया था। मगर, अब रजिस्ट्रेशन में खेत मालिक का आधार कार्ड और उसकी फैमिली आईडी का नंबर पोर्टल पर दर्ज होगा। इसके बाद खेत मालिक के रजिस्टर्ड नंबर पर ही ओटीपी जाएगा, तभी रजिस्ट्रेशन होगा। हालांकि पोर्टल के अपडेट होने से कई किसानों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं।
रबी फसल सीजन 2023 के लिए मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर सरकार द्वारा अपडेट किया गया है। पोर्टल पर फसल रजिस्ट्रेशन करते समय राजस्व विभाग के रिकाॅर्ड में दर्ज भूमि मालिक का आधार कार्ड या परिवार पहचान पत्र नंबर दर्ज करना अनिवार्य होगा। इसके बिना पोर्टल पर फसल रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को ही आगे नहीं बढ़ाएगा। वहीं, खुद काश्त या मालिक से पारिवारिक संबंध में भी परिवार पहचान पत्र में दर्ज नाम और राजस्व रिकार्ड में दर्ज नाम का मिलान नहीं होने से भी फसल रजिस्ट्रेशन नहीं होगा।
भिवानी जिले में पिछले रबी सीजन के दौरान 62 फीसदी किसानों का रजिस्ट्रेशन हुआ था। फिलहाल इस साल रबी सीजन का रजिस्ट्रेशन के लिए सरकार ने अपडेट फीचर्स के साथ पोर्टल खोल दिया है। भिवानी जिले में छह लाख 94 हजार 300 एकड़ काश्त योग्य भूमि है। जिले में करीब 65 से 70 हजार किसान अपनी फसल का रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर दर्ज कराते हैं। रबी सीजन में ज्यादातर किसान गेहूं, जौ, सरसों, चना की फसल ही रजिस्ट्रेशन कराते हैं। संवाद
ऐसे होगा रजिस्टेशन
किसी किसान ने पांच एकड़ भूमि ठेके या बंटाई पर ली हुई है, तो उसे पोर्टल पर अन्य काश्तकार वाले कॉलम में ठेके पर ली गई जमीन या बंटाई पर ली गई जमीन ऑप्शन पर फसल का रजिस्ट्रेशन करना होगा। इसमें जमीन मालिकों के राजस्व रिकाॅर्ड में दर्ज नाम दर्शाना होगा और किसान जिस भी मालिक के नाम का चयन करता है तो उसे उस मालिक का आधार कार्ड नंबर या परिवार पहचान पत्र संख्या पोर्टल पर दर्ज करनी होगी। इनके खेत मालिक का आधार कार्ड और परिवार पहचान पत्र नहीं है, उनका रजिस्ट्रेशन नहीं होगा। राजस्व रिकाॅर्ड में वर्तमान में बहुत से ऐसे भूमि मालिक है, जिनकी 2011-12 से पहले मृत्यु हो चुकी है और उनका आधार कार्ड नहीं बना हुआ, ऐसे किसानों के लिए मुश्किल होगी।
मालिक गए सिधार, अब कैसे जुड़े पोर्टल पर आधार
तहसील क्षेत्र के किसान सतबीर ने बताया कि उसने आठ एकड़ भूमि ठेके पर ली हुई और खेत मालिक का परिवार दूसरे प्रदेश में रहता है। खेत मालिक की मृत्यु 2010 से पहले हो चुकी है, लेकिन दीवानी विवाद के कारण जमीन आगे खेत मालिक के परिवार के नाम ट्रांसफर नहीं हुई। वहीं, दूसरे प्रदेश में रहने के कारण खेत मालिक का परिवार पहचान पत्र भी नहीं बना हुआ। इसके कारण वह स्वयं भी फसल रजिस्ट्रेशन नहीं कर सकते। अब पोर्टल पर भूमि मालिक का आधार कार्ड या परिवार पहचान पत्र मांगा जा रहा है, जिससे बिना पोर्टल फसल पंजीकरण नहीं करता। वहीं किसान रमेश का कहना है कि उसके परिवार के पास पांच एकड़ भूमि है जो उसके पिता के नाम रजिस्टर्ड है। लेकिन अब पोर्टल पर भूमि मालिक का आधार कार्ड या पीपीपी नंबर मांगा जा रहा है, जिसके कारण वह फसल पंजीकरण नहीं कर सकता। वह पिछले काफी समय से अपने पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए प्रयास कर रहा है, लेकिन कहीं भी रिकॉर्ड नहीं होने के कारण कागजी प्रक्रिया में लंबा समय लग रहा है। उसके पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं होने के कारण जमीन उसके नाम पर ट्रांसफर भी नहीं हो रही है।
हरियाणा सरकार ने मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर कुछ खामियों को दूर कराने के लिए उसे अपडेट किया है। इसके बाद पोर्टल पर काश्तकार कॉलम में भी फसल का रजिस्ट्रेशन कराने में खेत मालिक का आधार या फिर फैमिली आईडी नंबर दर्ज होगा। इसका ओटीपी भी रजिस्टर्ड नंबर पर ही जाएगा। इसके बाद ही रजिस्ट्रेशन संभव होगा। पोर्टल पर फर्जी रजिस्ट्रेशन को रोकने के लिए सरकार ने ये कदम उठाया है। इससे कोई भी व्यक्ति किसी अन्य की भूमि के नाम से अपना रजिस्ट्रेशन दर्ज नहीं करा पाएगा।
- डॉ. विनोद फौगाट, कृषि उपनिदेशक भिवानी।