16 दिसंबर की रात से मोहला हैड से पानी चला था। 17 दिसंबर को जिले की नहरों में पानी पहुंचा था। शुरूआत में नहरी पानी कम होने की वजह से चार दिन सुंदर सब ब्रांच नहर चलाई गई। जबकि चार दिनों तक जूई नहर को भी बंद रखना पड़ा। अब जूई नहर में 800 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जबकि निगाना फीडर में भी 100 क्यूसेक से अधिक पानी चल रहा है। अब सुंदर सब ब्रांच नहर बंद है। तीन दिन अतिरिक्त नहरी पानी चलाने की अनुमति मिलने के बाद रविवार शाम से फिर से सुंदर सब ब्रांच में पानी छोड़ा जाएगा। इस दौरान जूई और निगाना फीडर को भी पानी मिलेगा। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग अधिकारियों का कहना है कि दो से तीन दिन के अंदर जलघर टैंकों को भरने का प्रयास रहेगा। इस अवधि में टैंक भरे तो शहर में नियमित पेयजल आपूर्ति देना संभव होगा। फिलहाल शहर में एक दिन छोड़ एक दिन पेयजल आपूर्ति दी जा रही है।
किसानों को नहीं मिला पर्याप्त नहरी पानी
नहरी शेड्यूल के हिसाब से ही किसानों को खेतों में सिंचाई के लिए पानी भी निर्धारित किया हुआ है। नहरी पानी की कमी की वजह से सिंचाई विभाग अधिकारियों ने नहरों में चार दिन पानी बंद रखा था। इन नहरों से सिंचाई के लिए खेतों में पानी लेने वाले किसानों को पानी नहीं मिल पाया। अब तीन दिन अतिरिक्त नहरी पानी चलेगा तो भी जिन किसानों को पहले पानी मिला था उन्हें अब दोबारा से पानी उपलब्ध हो जाएगा। इससे विकट स्थिति यह बनी है कि कुछ किसान तो अपने खेतों में एक सप्ताह बाद दोबारा से सिंचाई के लिए पानी का इस्तेमाल कर पाएंगे। जबकि अधिकांश किसान दूसरे सप्ताह भी नहरी पानी नहीं मिलने से सिंचाई से महरूम रहेंगे। विभाग के समक्ष भी किसानों की शिकायतें पहुंच रही हैं, मगर अधिकारी चाहकर भी समाधान नहीं कर पा रहे हैं।
तीन दिन अतिरिक्त पानी की अनुमति मिल गई है। फिलहाल जूई फीडर और निंगाना फीडर में पानी चल रहा है। सुंदर नहर में रविवार शाम से पानी फिर से चलाया जाएगा। हमारी प्राथमिकता शहरी और ग्रामीण जलघर के टैंकों को भरने की रहेगी वहीं शेड्यूल के हिसाब से किसानों को भी खेतों में सिंचाई के लिए पानी मुहैया होगा।
-जितेंद्र मान, कार्यकारी अभियंता, भिवानी वाटर सर्विसेज भिवानी सिंचाई विभाग।
शहर के पुराने जलघर में दो टैंकों के अंदर सात से दस फूट पानी का भंडारण हुआ है। लगातार टैंकों को भरने की कोशिश की जा रही है। पानी के टैंक भरने के बाद ही शहरी दायरे में नियमित पेयजल आपूर्ति संभव हो पाएगी।
-सतीशचंद्र, एसडीओ, शहरी पेयजल शाखा जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग भिवानी।