भिवानी। अब भिवानी कलस्टर पर जल्द ही ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्लांट शुरू होगा। इसमें भिवानी, चरखी दादरी, बवानीखेड़ा, लोहारू और बाढड़ा से रोजाना कचरा उठान कर दादरी रोड स्थित डंपिंग यार्ड तक पहुंचेगा। इस कचरे का निस्तारण के लिए ओपन टेक्रालॉजी से अलग-अलग प्लांट लगाए जाएंगे। इसमें बायो मेथेनेशन प्लांट, कंपोस्ट प्लांट और वेस्ट टू एनर्जी प्लांट शामिल होगा। इन दो शहर और तीन कस्बाई इलाकों से रोजाना करीब 200 टन सूखा और गीला कचरा दादरी रोड के डंपिंग यार्ड तक पहुंचेगा। इसका हाथों-हाथ निस्तारण होगा। इसके लिए शहरी निकाय एवं विकास विभाग ने टेंडर करा दिए हैं। इसके वर्कऑर्डर जारी करने की प्रक्रिया भी जल्द पूरी होगी। इसके बाद अगले 22 साल तक एक ही कंपनी को ये काम सौंप दिया जाएगा।
भिवानी शहर के 31 वार्डों से रोजाना करीब 100 टन सूखा और गीला कचरा निकल रहा है। इसी के साथ चरखी दादरी शहर से भी रोजाना करीब 40 से 50 टन सूखा और गीला कचरा निकल रहा है। इसके अलावा बवानीखेड़ा, लोहारू और बाढड़ा में भी रोजाना करीब दस-दस टन सूखा और गीला कचरा एकत्रित किया जा रहा है। कुल मिलाकर करीब 200 टन कचरा रोजाना इन जगहों से निकल रहा है। इतने ज्यादा कचरे को एक ही जगह पर डंपिंग यार्ड में लाया जाएगा। जहां पर उसका निस्तारण अलग-अलग मशीनों के जरिए किया जाएगा। शहरी निकाय एवं विकास विभाग ने टेंडर करा दिए हैं। इसमें 2495 रुपये प्रति टन कचरा निस्तारण का रेट भी लगभग तय हो गया है। जिस कंपनी को ये ठेका मिलेगा। उसी कंपनी की ओर से कचरे का निस्तारण कर उससे खाद और मेटल व प्लास्टिक कचरा अलग अलग किए जाने के संयंत्र लगाए जाएंगे। इसके बाद रोजाना डंपिंग यार्ड में पहुंचने वाला कचरा सीधा मशीनों में पहुंच खाद और कचरे से इस्तेमाल होने वाली चीजों में तबदील हो जाएगा।
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डोर-टू-डोर एकत्रित होगा सूखा और गीला कचरा
नई कंपनी द्वारा ही भिवानी, चरखी दादरी, लोहारू, बवानीखेड़ा और बाढड़ा में घर-घर कचरे को एकत्रित कर उसे डंपिंग प्वाइंट या सीधे डंपिंग यार्ड तक पहुंचाएगी। इसके लिए कंपनी को ही डोर-टू-डोर कचरा एकत्रित करने के लिए अपना रूट चार्ट बनाना होगा और कंपनी द्वारा ही इन इलाकों में अधिकतर घरों से कचरा एकत्रित करने की रणनीति पर काम करना होगा। प्लांट में कचरे की तीन स्तर पर छंटाई की जाएगी। कचरे से प्लास्टिक कचरा को अलग किया जाएगा। इसके अलावा लोहा, पीतल, तांबा आदि ठोस कचरा को भी कचरे से अलग किया जाएगा। इसके बाद कचरे से निकलने वाली मिट्टी को अलग किया जाएगा, जिससे कंपोस्ट खाद बनाई जाएगी। शेष कूड़े को डिस्पोज किया जाएगा।
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पहले बनाया जाना था बवानीखेड़ा में प्लांट
ठोस कूड़ा कचरा प्रबंधन प्लांट पहले 21 एकड़ भूमि में बवानीखेड़ा में बनाया जाना था। प्रक्रिया शुरू हुई तो कस्बावासियों ने इसका विरोध किया। इसके चलते प्लांट निर्माण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। अब लोहारू, चरखी दादरी की बवानीखेड़ा से अधिक दूरी होने के कारण अधिक खर्च बढ़ रहा था। ऐसे में सरकार ने इसे बवानीखेड़ा की बजाए भिवानी में बनाए जाने का निर्णय लिया।
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कलस्टर के जल्द ही वर्कऑर्डर मिल जाएंगे। जब तक वर्कऑर्डर नहीं मिल जाते तब तक तुलसियान एजेंसी को यह कार्य दिया गया है। शहर में सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए नगर परिषद लगातार प्रयासरत है।
- सत्येंद्र मोर, उप प्रधान नगर परिषद भिवानी।