भिवानी। पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने एलान किया है कि ‘विपक्ष आपके समक्ष’ कार्यक्रम का अगला पड़ाव कुरुक्षेत्र होगा। कुरुक्षेत्र में 23 जनवरी को विपक्ष हरियाणा की जनता के बीच पहुंचेगा और उनकी समस्याओं को सुनेगा। पूर्व सीएम हुड्डा शुक्रवार को संदीप तंवर की माता के निधन पर शोक व्यक्त करने भिवानी पहुंचे थे।
इस मौके पर पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए नेता प्रतिपक्ष ने बीजेपी-जेजेपी सरकार को हर मोर्चे पर विफल करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार का रिपोर्ट कार्ड खुद उसकी विफलताओं को उजागर कर रहा है।
कांग्रेस सरकार के दौरान 2014 से पहले हरियाणा प्रति व्यक्ति आय, प्रति व्यक्ति निवेश, रोजगार सृजन, विकास, खुशहाली, बुजुर्गों, खिलाड़ियों और किसानों में पहले नंबर पर था, लेकिन बीजेपी व बीजेपी-जेजेपी सरकार ने आज हरियाणा को बेरोजगारी, अपराध, भ्रष्टाचार, बदहाली और किसानों पर अत्याचार के मामले में नंबर वन बना दिया है। यही वजह है कि आज हर वर्ग इस सरकार से छुटकारा चाहता है।
हुड्डा ने कहा कि जो लोग बुजुर्गों को 5100 रुपये पेंशन देने का वादा करके सत्ता में आए थे, वे अपने वादे के विपरीत बुजुर्गों का सहारा छीनने का काम कर रहे हैं। इस सरकार ने ऐसे हजारों बुजुर्गों की पेंशन बंद कर दी है, जिन्हें कांग्रेस सरकार ने पेंशन सूची में शामिल किया था। इसलिए मौजूदा सरकार पिछली सरकार पर ठीकरा फोड़ने की बजाय सभी बुजुर्गों की पेंशन फिर बहाल करे।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की बीजेपी-जेजेपी सरकार को पिछले सालों में हुई अपनी गलती, घोटालों और नकारापन से सीख लेते हुए नए साल में सुधार करना चाहिए। जिस तरह कोरोना का नया वैरिएंट अन्य राज्यों की तरह हरियाणा में भी दस्तक दे चुका है। लोगों को इससे सतर्क रहने की जरूरत है। साथ ही सरकार को वक्त रहते स्वास्थ्य सेवाएं दुरुस्त करनी चाहिए। स्वास्थ्य महकमे में खाली पड़े 10 हजार पदों पर फौरन भर्तियां करते हुए उसे अस्पतालों में जरूरत के मुताबिक डॉक्टर्स और स्टाफ को नियुक्ति देनी चाहिए। सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि पिछले साल की तरह जरूरत पड़ने पर मरीजों को किसी भी दवाई, ऑक्सीजन और हॉस्पिटल बेड की कमी पेश ना आए।
नेता प्रतिपक्षा भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने किसान आंदोलन को याद करते हुए कहा कि इसमें अन्नदाता की बहुत बड़ी जीत हुई है। शायद ऐसा पहली बार हुआ है कि सरकार द्वारा बनाया गया कानून बिना लागू किए ही वापस लेना पड़ा हो। इसका श्रेय पूर्णत: किसानों के शांतिपूर्ण संघर्ष को जाता है। उन्होंने सरकार को नसीहत दी कि वह भविष्य में ऐसी कोई नीति ना बनाएं जिसके विरोध में किसानों को फिर सड़कों पर उतरना पड़े।