भिवानी। गांवों में नई सरकार के हाथों में कमान आ गई है। लेकिन पुरानी पंचायतों के आधे अधूरे रिकॉर्ड के साथ विकास का दम भरने में ग्राम पंचायतों के कदम जरूर ठिठक गए हैं। जिले में पुराने रिकॉर्ड को नई पंचायतों ने अपने अधीन नहीं लिया है। इसकी वजह गड़बड़ी की आशंका है। जिला विकास एवं पंचायत विभाग के पास भी इस तरह की जानकारी आई हैं, लेकिन अभी तक कोई शिकायत नहीं की गई है। इतना ही नहीं जिले में इस बार 18 सरपंच और 2237 पंच निर्विरोध चुने गए हैं, लेकिन अभी तक इन गांवों की पंचायतों के खाते में सीएम घोषणा की राशि भी नहीं आई है। गांवों में नई पंचायतों ने नए मसौदों पर काम भी शुरू कर दिया है।
भिवानी जिले के 312 गांवों में 294 ग्राम पंचायतों में सरपंच पद के लिए चुनाव कराया गया था। जबकि 18 गांवों के ग्रामीणों ने बिना चुनाव के ही अपना सरपंच निर्विरोध चुन लिया था। ग्राम पंचायतों में इस बार 152 महिलाएं भी सरपंच चुनी गई थी, जबकि 160 पुरुष सरपंच बने थे। सभी गांवों में नई पंचायतों ने विधिवत रूप से अपना कार्यभार संभाल लिया है, लेकिन कई गांवों में नई विकास की परियोजनाएं सिर्फ इस आशंका से प्रारूप में नहीं आई हैं कि पिछली पंचायत ने कई गड़बड़झाले कर डाले हैं। इन गड़बड़झालों की वजह से नए कार्यों पर भी असर पड़ा है जबकि गांवों में कई परियोजनाएं भी अधूरी पड़ी हैं। हालांकि नई पंचायतों को नए सिरे से नए रिकार्ड के साथ कामकाज की शुरुआत करनी है। पुरानी पंचायतों के रिकॉर्ड लेने से करीब 8-10 सरपंचों कर इन्कार रहे हैं। दिलचस्प बात यह भी है कि कई गांवों में चुनावी रंजिश और आपसी खींचतान भी पंचायत के विकास कार्यों के लिए बड़ी अड़चन और रुकावट बन गई है।
इन कार्यों में गड़बड़ी की आशंका
गांव में गलियों के निर्माण में सबसे ज्यादा गड़बड़ी की आशंका बनी है। इसके बाद गांव में पंचायत के बजट से खुद अपनी मर्जी से कराए गए कार्यों पर भी घोटाले की आशंका जताई जा रही है। पंचायतों के कार्यकाल पूरा होने के बाद पंचायतों का रिकार्ड ग्राम सचिवों के पास भी आ गया था। इसके बाद कई गांवों में ग्राम सचिव की निगरानी में भी कार्य कराए गए हैं। ऐसे में नई पंचायतें पूर्व सरपंचों व ग्राम सचिवों द्वारा अपने स्तर पर कराए गए कार्यों के रिकार्ड की पुष्टि करने से हिचक रही है।
ये हुई थी निर्विरोध पंचायत चुनने पर घोषणा
सरकार ने निर्विरोध पंचायतों के चुनने पर प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की थी। इसमें गांव की पूरी पंचायत को सर्वसम्मति से चुनने पर ग्राम पंचायत को 11 लाख रुपये व सरपंच निर्विरोध चुने जाने पर पांच लाख रुपये संबंधित पंचायत को देने की घोषणा हुई थी। इसी तरह गांव में निर्विरोध पंच चुने जाने पर प्रति पंच 50 हजार रुपये ग्राम पंचायत को देने की सीएम ने घोषणा की। लेकिन ग्राम पंचायतों के खाते में अभी तक सरकार की घोषणा का एक भी पैसा नहीं आया है। अगर ये पैसा पंचायत के खाते में आता है तो इससे गांव का विकास कराना आसान होगा।
नई ग्राम पंचायतों को नए रिकार्ड के साथ अपना कामकाज सुचारु ढंग से चलाना है। ग्राम पंचायतों के पुराने रिकार्ड की नई पंचायतों की कोई जवाबदेही नहीं है। अगर किसी गांव में सरपंच व ग्राम सचिव के रिकार्ड में कोई गड़बड़ी की शिकायत आती है तो उसी आधार पर कार्रवाई होगी। फिलहाल नई ग्राम पंचायतें किसी तरह की कोई आशंका न रखें और नए रिकार्ड को अपडेट रखते हुए गांवों में विकास के काम कराएं। जिन गांवों में सरपंच और पंच निर्विरोध चुने गए थे, उनके संबंध में सरकार को रिपोर्ट भेज दी है, जल्द ही सीएम घोषणा का पैसा सीधे ग्राम पंचायतों के खाते में आएगा।
-रवींद्र दलाल, डीडीपीओ भिवानी।