भिवानी। शिक्षा विभाग ने राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूलों में दाखिलों को लेकर नया खाका तैयार किया है। अब हर कक्षा के प्रत्येक सेक्शन में बच्चों की संख्या निर्धारित रहेगी। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी संतोष नागर ने बताया कि किसी कक्षा में बच्चों की संख्या कम हुई तो ड्रा के जरिए दाखिला किया जाए। साथ ही प्रत्येक प्राइमरी स्कूल में बाल वाटिका कक्षा शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
प्रत्येक मॉडल संस्कृति स्कूल में बाल वाटिका कक्षा शुरू करना जरूरी है। कक्षा में अधिकतम संख्या में बच्चों का दाखिला किया जाए। यहां तक कि कक्षा के बच्चों से कोई फीस नहीं ली जाएगी। यह नई व्यवस्था केवल राजकीय सांस्कृतिक मॉडल स्कूलों में ही लागू होगी।
शिक्षा विभाग ने संस्कृति मॉडल स्कूलों में बच्चों के दाखिले का शेड्यूल जारी किया है। निर्देशों में बताया है कि प्रत्येक विद्यालय अपनी प्रबंधन समिति के सदस्यों के साथ बैठक करके स्कूल में कमरों व ढांचागत सुविधाओं के हिसाब से सीटों का निर्धारण करेंगे। इस बारे में इसी सप्ताह एसएमसी के सदस्यों की बैठक बुलाकर विचार-विमर्श किया जाएगा। साथ ही भेजे गए निर्देशों में कहा है कि एसएमसी की बैठक में ही पहली, छठी, नौवीं व 11वीं कक्षा में अंग्रेजी माध्यम के लिए बच्चों के दाखिले किए जाएं। बाकी कक्षाओं में सीटें रिक्त होने पर ही दाखिले हो पाएंगे। पहले से 11वीं कक्षा में पढ़ रहे बच्चों को उसी स्कूल में दाखिलों में प्राथमिकता दी जाएगी।
12 अप्रैल को होगा दाखिले का ड्रॉ
दाखिला प्रक्रिया 23 मार्च से शुरू हो चुकी है। पहली अप्रैल से दस अप्रैल तक अभिभावक अपने बच्चों के दाखिले के लिए आवेदन विद्यालय मुखिया के पास जमा करवाए। उसके बाद 12 अप्रैल को बच्चों के दाखिले का ड्रा निकाला जाएगा। ड्रा में जिन बच्चों के नाम सूची में होंगे। उन बच्चों का दाखिला होगा। उसके बाद 18 अप्रैल को जिन बच्चों के नाम दाखिला सूची में प्रतीक्षा में हैं। उनको मौका दिया जाए। इस बारे में किसी तरह की कोई कोताही व अनियमितता नहीं होनी चाहिए। अगर किसी शिक्षक या मुखिया ने गड़बड़ी की तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
मौलिक शिक्षा निदेशालय से हमारे पास दाखिलों से संबंधित पत्र पहुंचा है। पत्र मिलते ही सभी राजकीय सांस्कृतिक मॉडल स्कूलोंं में भेज दिया है। साथ ही पत्र के हिसाब से दाखिला करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि स्कूलों में बच्चों की संख्या में इजाफा किया जा सके।
- संतोष नागर, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी