भिवानी। कोरोना की तरह ही लंपी स्कीन वायरस में भी लापरवाही महंगी साबित हो रही है। न दूसरे राज्यों व जिलों से पशुओं की खरीद-फरोख्त रुक रही है और न ही लंपी के फैलाव को रोकने के लिए अन्य कोई कारगर कदम उठाया जा रहा है। इतना ही नहीं नई समस्या यह भी खड़ी हो गई है कि पशुपालक चिकित्सकों को उनके पशुओं को वैक्सीन लगाने से भी रोक रहे हैं।
ऐसे में लंपी वायरस से लड़ाई आसान नहीं। शुक्रवार को भी 192 पशु लंपी आशंकित नजर आए। जिसके बाद आशंकितों का आंकड़ा करीब 1487 तक पहुंच गया है। शुक्रवार को 13 आशंकित पशु दम तोड़ गए। इनमें अधिकतर गाय है। अब तक जिले में 38 पशु दम तोड़ चुके हैं।
बेरोक-टोक सीमा पार से आ रहे पशु
लंपी स्कीन वायरस कहर बरपा रहा है। जिला प्रशासन ने सभी तरह के मेलों, अन्य जिलों से पशुओं को लाने पर प्रतिबंध लगा रखा है। मगर फिर भी पशु बेरोक-टोक सीमा पार कर जिले में लाए जा रहे हैं। राजस्थान से अब भी गाय व अन्य पशुओं को जिले में लाया जा रहा है। उन्हें रोकने-टोकने वाला तक कोई नहीं है।
लठ लेकर वैक्सीन का विरोध
लंपी से लड़ाई में एक बाधा पशुपालकों का सहयोग नहीं मिलना भी है। पशुपालन विभाग ने पशुओं को लंपी वायरस से बचाने के लिए वैक्सीनेशन अभियान चलाया हुआ है। मगर काफी गांवों में पशुपालक वैक्सीनेशन का विरोध कर रहे हैं। सूत्र बताते है कि बवानीखेड़ा, भिवानी खंड के कुछ गांवों में तो पशुपालक लठ लेकर वैक्सीनेशन के लिए आने वाले पशुपालन विभाग के कर्मचारियों का विरोध कर रहे हैं।
बिना सूचना दिए दबाए जा रहे मृत पशु
ग्रामीण क्षेत्र में काफी लोग पशुपालन विभाग को सूचना दिए बिना ही मृत गायों व अन्य पशुओं को दबा रहे हैं। कुछ जगह सूचनाएं ये भी है कि लंपी वायरस की आशंका में अन्य पशुओं को बचाने के लिए आशंकित पशुओं को जहरीला पदार्थ देकर मारा जा रहा है। जबकि चिकित्सकों ने स्पष्ट किया है कि लंपी में मृत्यु दर महज एक से पांच प्रतिशत ही है। पशुपालक सावधानी रखते हुए पशु का इलाज करें, पशु पहले की तरह बिलकुल ठीक हो जाएगा।
लावारिस पशुओं को नंदीशाला में ही रोका
अब पशुओं में लंपी स्कीन वायरस का कहर चल रहा है। पशुओं में लंपी के लक्षण एक सप्ताह से 10 दिन बाद नजर आते हैं। शहर में करीब दो हजार लावारिस पशु भी सड़कों पर घूम रहे हैं। लंपी के खतरे को देखते हुए इन्हें अलग रखने की जरूरत थी मगर नगर परिषद की ओर से अभियान चलाकर काफी लावारिस पशुओं को पिछले चार-पांच दिन के दौरान ही नंदीशाला में रोक दिया है। जिस कारण नंदीशाला में रह रहे करीब 900 अन्य गोवंश पर भी खतरा मंडरा गया है।
पशुपालन विभाग ने छेड़ा जांच और वैक्सीनेशन अभियान
पशुपालन विभाग ने लंपी से बचाव के लिए वैक्सीनेशन अभियान को तेज कर दिया है। साथ ही जांच अभियान भी चलाया जा रहा है। शुक्रवार को जिलेभर में 12,300 पशुओं को वैक्सीन लगाई गई। पशुपालन विभाग की टीमों ने जिलेभर की विभिन्न गोशालाओं का निरीक्षण कर गायों व अन्य पशुओं की सेहत की जांच की।
स्वाइन फीवर भी बन रहा घातक
लंपी स्कीन वायरस के साथ स्वाइन फीवर भी घातक साबित हो रहा है। शुक्रवार को भी तीन सूअरों की मौत की सूचना है। हालांकि विभाग की ओर से लगातार पशुपालकों को जागरूक किया जा रहा है। कुछ सैंपल भी जांच के लिए लैब भेजे गए है।
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जिले में कुछ गांवों को छोड़कर स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। अब तक करीब 1500 आशंकित पशु सामने आए है, जिनका इलाज चल रहा है। बीमारी से बचाव में पशुपालकों को भी सहयोग करना होगा और सावधानी रखनी होगी। पशुपालक पशु का पूरा ध्यान रखे खासकर साफ-सफाई पर फोकस रखे। मक्खी-मच्छर न होने दे। वैक्सीन लगाने आने वाले स्टाफ को सहयोग करें। दूसरे राज्यों या जिलों से अभी पशु न लाए।
- डॉ. प्रदीप कुमार, एसडीओ, पशु पालन विभाग।