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खेल: बर्मिंघम में चले नीतू के मुक्के, धनाना में झूमे परिजन व ग्रामीण

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भिवानी। इंग्लैंड के बर्मिंघम शहर में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में गांव धनाना की बेटी नीतू घनघस ने क्वार्टर फाइनल में आयरलैंड की मुक्केबाज को 5-0 से एकतरफा हराकर सेमीफाइनल की टिकट पक्की की है। इस मैच के बाद मुक्केबाज नीतू ने पदक पक्का कर लिया है। उसकी जीत पर गांव धनाना में उसके परिजनों और ग्रामीणों ने लड्डू बांटकर खुशी जाहिर की। अब छह अगस्त को उसका सेमीफाइनल मैच होगा।
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नीतू के कोच जगदीश सिंह और परिजनों ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि नीतू कॉमनवेल्थ में स्वर्ण पदक के साथ वतन लौटेंगी। वहीं बुधवार को हुए मैच में नीतू ने एकतरफा कर दिया, जिसके सामने प्रतिद्वंद्वी मुक्केबाज टिक नहीं पाई। कोच जगदीश सिंह, कमल प्रधान, पिता जयभगवान, ताऊ रणबीर प्रधान ने नीतू के बेहतरीन प्रदर्शन पर खुशी जताई।
नीतू ने बनाई मुक्केबाजी में अलग पहचान
जिले के गांव धनाना निवासी नीतू घनघस (21) ने वर्ष 2012 में भिवानी में कोच जगदीश के पास ट्रेनिंग शुरू की थी। मेहनत के बल पर वह आज इस मुकाम पर पहुंची है। 48 किलो भारवर्ग की बॉक्सर नीतू सीबीएलयू से एमपीएड की पढ़ाई कर रही है। मुक्केबाजी में महज 10 साल के सफर में नीतू ने गांव की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बना दी है।
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नीतू घनघस की प्रमुख उपलब्धियां
वर्ष-2017 में वर्ल्ड चैंपियनशिप गोवाहटी में स्वर्ण पदक।
वर्ष 2018 में एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक।
वर्ष-2018 वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक।
वर्ष 2022 में सोफिया बुल्गारिया में हुए स्ट्रेडजा कप इटली की खिलाड़ी हो हराकर जीता स्वर्ण पदक।
नीतू की एकाग्रता और फुर्ती है विशेष खूबी
कोच जगदीश सिंह ने बताया कि नीतू सामने वाले खिलाड़ी के खेलने के तरीके को एकाग्रता से देखती है, जिसके बाद जब सामने वाला मुक्केबाज उसे पंच लगाने आता है तो नीतू उससे पहले उसे पंच लगा देती है। ऐसे में नीतू की एकाग्रता और फुर्ती उसमें विशेष खूबी है, जिससे उसने मुक्केबाजी में अपनी पहचान बनाई है।
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