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Bhiwani News: जिलेभर में टीबी, एचआईवी और कुष्ठ रोगियों की पहचान में जुटीं 664 टीमें

Sun, 05 Feb 2023 11:06 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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ईंट भट्ठा अजीतपुर में लोगों को जागरूक करते स्वास्थ्यकर्मी।
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भिवानी। स्वास्थ्य विभाग ने टीबी, एचआईवी और कुष्ठ रोगियों का पता लगाने के लिए एक माह का विशेष अभियान चलाया है। इसमें 664 टीमें जुटी हैं। अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की मोबाइल एम्बुलेंस वैन ईंट-भट्टे सहित ऐसे जगह जा रही है जहां चिकित्सा सुविधाएं नहीं हैं। पांच सदस्यीय टीम लोगों की काउंसिलिंग के साथ उनमें बीमारियों के लक्षण होने पर सैंपल भी ले रही है। टीम ने रविवार को 100 लोगों की काउंसिलिंग की, जबकि 54 के एचआईवी जांच के सैंपल लिए हैं। इसकी रिपोर्ट निगेटिव आईं हैं। वहीं टीबी के आशंकित मरीजों की भी बलगम जांच की जा रही है। हालांकि अब तक टीबी, एचआईवी और कुष्ठ रोगी सामने नहीं आया है।
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जिले में टीबी के प्रति एक फरवरी से दो मार्च 2023 तक जागरूक अभियान चलाया जाएगा और घर-घर जाकर प्रत्येक व्यक्ति की टीबी की बीमारी से संबंधित सभी जानकारी ली जाएगी। जिले में कुल सात लाख 67 हजार 823 जनसंख्या हैं, जिसके सर्वे के लिए 664 टीमों का गठन किया है। सर्वे के लिए बवानीखेड़ा में 76 टीम जो की ईंट-भट्ठे, जिसमें गांव बड़सी, सिकंदरपुर और जीताखेड़ी में जाकर सर्वे की जा रही हैं। तोशाम में 223 टीम खानक, डाडम आदि स्लम एरिया, लोहारू में 148 टीम वार्ड नंबर 10 चहड़ कलां, कुड़ल में सर्वे में जुटी हैं। इसी प्रकार सिवानी में 56 टीमें वार्ड नंबर 11, वार्ड नंबर 3 और फैक्ट्री एरिया भिवानी में कुल 161 टीम जोकि हनुमान गेट एरिया, दादरी गेट एरिया, सेवा नगर एरिया में घर-घर जाकर टीबी के एक्टिव केस के लिए सर्वे करने में जुटी है।
नागरिक अस्पताल से 1900 एचआईवी संक्रमित ले रहे दवा
जिले में पिछले छह साल में एड्स के 1949 मरीज सामने आए हैं, जिसमें से 49 ने अपनी जान गवा दी। नागरिक अस्पताल में बने एफआईएआरटी सेंटर से फिलहाल 1900 संक्रमित निशुल्क दवा ले रहे हैं। इनमें से 139 संक्रमितों को प्रति माह 2250 रुपये की राशि पेंशन के तौर पर मिल रही है। इसमें जरूरी है कि संक्रमित की आय दो लाख रुपये से कम हो, वह हरियाणा का स्थायी निवासी हो और सरकारी अस्पताल में बने एफआईएआरटी सेंटर से प्रति माह दवा लेता हो।
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जिले में टीबी के 1980 सक्रिय मरीज
जिले में फिलहाल टीबी के 1980 सक्रिय मरीज हैं। इनमें से अधिकतर मरीज सरकारी अस्पतालों से ही दवा ले रहे हैं, जबकि महज कुछ मरीज निजी अस्पतालों में उपचार करवा रहे हैं। जिले के 207 मरीजों का टीबी निवारण उपचार चल रहा है। टीबी के दौरान मरीज को सरकार द्वारा 500 रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं।
अगर कोई भी टीबी का मरीज अपना पूरा ध्यान नही रखता है, खांसते या छींकते समय मुंह पर कपड़ा नहीं रखता है, तो वह व्यक्ति दूसरों को टीबी का मरीज बना सकता है। इसलिए टीबी के मरीज को यह ध्यान रखना चाहिए कि वह खांसते या छींकते समय मुंह पर कपड़ा अवश्य रखें। विभाग की ओर से टीबी, एचआईवी और कुष्ठ रोगियों की पहचान करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। ताकि मरीज की पहचान हो सकें और उन्हें उचित चिकित्सा सुविधाएं मिल सके।
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- डॉ. सुमन विश्वकर्मा, उप सिविल सर्जन।
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