अपनी शिकायत को लेकर बवानीखेड़ा पुलिस थाना के बाहर खड़ी महिला व उसके परिजन।
भिवानी। नौ माह की दुधमुंही बच्ची को देखने के लिए 23 दिन से मां की आंखें तरस रही हैं। पीड़ित महिला अपने परिजनों के साथ बवानीखेड़ा के चक्कर लगा रही है। मगर न तो अब तक जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ है न ही पीड़िता को उसकी बच्ची मिली है। दरअसल पीड़ित महिला अपने ही ससुराल वालों पर उसकी दुधमुंही बच्ची को उससे छीनकर बंद किए जाने के गंभीर आरोप लगा रही है।
इस पर बाल कल्याण समिति ने भी महिला के बयान दर्ज कर इस संबंध में बवानीखेड़ा पुलिस थाना एसएचओ को जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत कार्रवाई की सिफारिश की जा चुकी है। रेवाड़ी निवासी कीर्ति भाटिया व उसकी मौसी ममता सचदेवा ने बताया कि पिछले कई दिनों से बवानीखेड़ा पुलिस थाना के चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन 23 दिन से कीर्ति को उसकी नौ माह की बच्ची को न तो मिलाया गया है न ही पुलिस ने अब तक जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत कोई कार्रवाई की है। पीड़ित महिला कीर्ति इस संबंध में बवानीखेड़ा पुलिस और बाल कल्याण समिति के समक्ष भी अपने लिखित बयान दर्ज करा चुकी है।
कीर्ति का कहना है कि उसकी शादी करीब दो साल पहले बवानीखेड़ा के डेरा बाबा रामरूप क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति से हुई थी। उसकी नौ माह की बेटी श्रेया है। महिला ने आरोप लगाया कि करीब 23 दिन पहले उसके पति और ससुराल पक्ष के लोगों ने उसके साथ मारपीट की थी। जिसके बाद उसे अस्पताल में दाखिल कराया था। जहां से वह अपनी मां के साथ मायके चली गई थी और उसकी नौ माह की बेटी ससुराल में ही छूट गई थी। बाद में वह अपनी बेटी को वापस लेने के लिए ससुराल गई, लेकिन ससुराल वालों ने उसकी बेटी को उसे सौंपना तो दूर उसे दिखाया तक नहीं। उसकी बेटी को नजरबंद कर दिया और कई बार उसके मायके वालों ने ससुराल में चक्कर काटे मगर एक बार भी बेटी को न तो दिखाया न ही उन्हें सौंपा। इस संबंध में पीड़ित महिला ने बाल कल्याण समिति के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद बाल कल्याण समिति सदस्यों ने बवानीखेड़ा पुलिस थाना एसएचओ को इस संबंध में जेजे एक्ट के तहत कार्रवाई किए जाने की सिफारिश और ईमेल से भेज दी।
पीड़ित महिला का कहना है कि इसके बाद भी बवानीखेड़ा पुलिस ने न तो उसके ससुराल वालों के खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं किया और न ही उसकी बेटी को उसे दिलाया है। कीर्ति की मौसी ममता सचदेवा का कहना है कि इस संबंध में पुलिस भी अब कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे रही है। दुधमुंही बच्ची को मां से दूर रखना अपराध है। लेकिन पुलिस ने महिला और बाल विरुद्ध अपराध और घरेलू हिंसा जैसे गंभीर मामलों में भी समय से कोई कार्रवाई नहीं की है वे 23 दिनों से लगातार न्याय और मासूम बच्ची को पाने के लिए भटक रहे हैं।
पीड़ित महिला अपने परिजनों के साथ बाल कल्याण समिति कार्यालय में आई थी उसी समय महिला के बयान दर्ज करने के उपरांत बवानीखेड़ा पुलिस थाना एसएचओ को हमने डाक और ई-मेल के माध्यम से शिकायत भेजकर इस मामले में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत कार्रवाई कर पीड़िता को उसकी बच्ची दिलाने की सिफारिश भेज दी थी, अब इस संबंध में आगामी कार्रवाई बवानीखेड़ा पुलिस द्वारा ही की जानी है।
-सतेंद्र तंवर, सदस्य बाल कल्याण समिति भिवानी