भिवानी। जिले के चार विधानसभा क्षेत्रों में कुल 103 प्रत्याशियों ने नामांकन कराया था, इनमें से 27 प्रत्याशियों के नामांकन रद्द होने के बाद 76 प्रत्याशी चुनावी मैदान में बचे हैं। नामांकन वापसी का अंतिम दिन सोमवार को है, ऐसे में रुठों को मनाने और मान मनौव्वल में भी राष्ट्रीय दलों के नेता जुटे हैं, क्योंकि कई बागियों ने पार्टी सिंबल के अलावा निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर भी नामांकन कराया था। टिकट न मिलने से नाराज नेता अब निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनावी ताल ठोक रहे हैं।
अकेले भिवानी विस क्षेत्र में आठ से दस प्रत्याशियों ने कांग्रेस से नामांकन भरा था, लेकिन अब तीनों विस क्षेत्रों में कांग्रेस से तीन प्रत्याशी ही चुनावी मैदान में डटे हैं, जबकि भिवानी जिले की भिवानी, लोहारू, तोशाम और बवानीखेड़ा सीट से 103 प्रत्याशियों ने नामांकन कराया था। इसमें आठ से दस प्रत्याशी तो ऐसे थे, जिन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और निर्दलीय दोनों से ही नामांकन दाखिल कर दिया। जिन नेताओं का कांग्रेस से पत्ता कटा अब वे निर्दलीय रूप प्रत्याशी हैं।
भिवानी विस क्षेत्र में 33 उम्मीदवारों ने नामांकन कराया। इनमें से 10 नामांकन रद्द हो गए जबकि पांच प्रत्याशियों स्वाति भारद्वाज, शंकरदास, जयकुमार, नीलम अग्रवाल, अभिजीत सिंह ने कांग्रेस से भी नामांकन किया था, जो बाद में रद्द हो गया। इसी तरह बवानीखेड़ा में 22 प्रत्याशियों ने नामांकन किया। इनमें से 10 आवेदन रद्द हो गए। वहां भी कांग्रेस से टिकट न मिलने पर विजय सिंह का नामांकन रद्द हुआ जबकि वहां कांग्रेस ने प्रदीप नरवाल को प्रत्याशी बनाया है।
तोशाम विस क्षेत्र में 28 नामांकन हुए। इनमें से चार नामांकन रद्द कर दिए। वहां भी कांग्रेस से संज्ञा चौधरी का नामांकन रद्द हुआ। लोहारू में 20 प्रत्याशियों ने चुनावी ताल ठोकी। इनमें से तीन आवेदन रद्द हुए। वहां भी कांग्रेस से आवेदन करने वाले नरेंद्र का नामांकन रद्द किया गया। ज्यादातर दावेदार कांग्रेस में ही दिखे। अब ये उम्मीदवार निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर खुद की पार्टी के नेता को ही टक्कर देने में लगे हैं।
अब सोमवार को नामांकन वापसी होनी है। ऐसे में पार्टी के नेता भी अब बगावती तेवर दिखाने वालों की मान मनौव्वल में लगे हैं। वह उन्हें अपने पक्ष में करने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। हालांकि अभी किसी बड़े नेता के समर्थन का दावा नहीं हुआ है, लेकिन रूठों को मनाने की राजनीति में विधानसभा चुनावों में सक्रियता भी बढ़ गई है।