भिवानी। गांव मित्ताथल के शिक्षक पवन ने हर जरूरतमंद के लिए रक्त मुहैया कराने में संकटमोचन की भूमिका निभाई है। वे खुद तो हर बार रक्तदान करने में आगे रहते ही हैं, साथ ही अब युवाओं के लिए भी रक्तवीर की भूमिका में प्रेरणादायी बने हैं। उन्हीं के गांव का लाडला रवींद्र धारीवाल दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में सेवा सुरक्षा और सहयोग नारे के साथ रक्तवीरों की फौज तैयार करने में अहम कड़ी बन गया है।
गांव मित्ताथल में युवा विकास क्लब से जुड़े 250 युवाओं से ही शिक्षक पवन ने रक्तवीरों का कुनबा भी तैयार किया है, जो हर समय रक्तदान के लिए तत्पर रहते हैं। गांव मित्ताथल निवासी शिक्षक पवन बजीणा (42) के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बतौर वर्क एजुकेशन अनुदेशक (आर्ट एंड क्राफ्ट) तैनात है। शिक्षक पवन ने बताया कि 2001 में युवा विकास क्लब बनाया था। उस समय गांव के विकास कार्याें में युवाओं की भागेदारी सुनिश्चित करना ही उनका मकसद था और छोटी मोटी गांव की समस्याओं का समाधान भी युवा आपस में मिलकर करते थे। करीब पांच साल पहले ही उड़ान सामाजिक संगठन बनाया। bसके बाद तो उन्होंने ऐसी उड़ान भरी की पवन लोगों के लिए संकट मोचन बन गए।
गांव के करीब ढाई सौ युवा ऐसे रक्तदाता हैं, जो जरूरत पड़ने पर किसी भी अनजान के लिए खून देने के लिए तैयार रहते हैं। पवन खुद 20 बार रक्तदान कर चुके हैं। पवन रक्तवीर की भूमिका में ही नहीं बल्कि पर्यावरण बचाने और खेलों को बढ़ावा देने में भी अपना योगदान दे रहे हैं। पवन का रक्त ग्रुप बी पॉजिटिव है। उनकी सोच भी रक्तदान के प्रति पॉजिटिव है।
खून की कमी से सड़क हादसे में मौत की खबर पढ़ने के बाद बने रक्तवीर
गांव मित्ताथल का रवींद्र धारीवाल दिल्ली पुलिस में बतौर कांस्टेबल तैनात है। रवींद्र 116 बार रक्तदान कर चुका है। उसने बताया कि वे अखबार पढ़ रहे थे, जिसमें उन्हें एक खबर ने झकझोर दिया। इसमें खून नहीं मिलने से सड़क हादसे में घायल ने दम तोड़ दिया था। इसके बाद से ही वे खुद तो नियमित रक्तदान करते ही हैं, साथ ही दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में करीब 900 पुलिस कर्मचारी और करीब 400 रक्तदाताओं का एक बड़ा समूह बनाया है, जो हर जरूरतमंद को खून मुहैया कराने के लिए चौबीसों घंटे तत्पर रहता है। रवींद्र गांव मित्ताथल में जब भी शिविर लगता है रक्तदान के लिए आता है।