बवानी खेड़ा। प्रथम विश्व युद्ध में सिंगापुर में शहादत देने वाले शहीदों की याद में गांव जमालपुर के पशु अस्पताल में बना शहीद स्मारक अनदेखी के चलते अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। करीब 100 वर्ष पहले बने शहीद स्मारक के आसपास गंदगी फैली है। हालात यहां तक बदतर हो गए हैं कि आसपास के बस्ती वासी स्मारक के इर्द-गिर्द गंदगी फैला रहे हैं। मगर न तो ग्राम पंचायत ने और न ही किसी सामाजिक संस्था ने शहीद स्मारक की हालात सुधारने के बारे में आज तक कोई प्रयास किया है।
ऐतिहासिक जानकारी के अनुसार प्रथम विश्व युद्ध के दौरान अंग्रेजों की सेना में लड़ रहे भारतीय सैनिकों में देश की आजादी को लेकर भारी जोश व्याप्त था। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान सिंगापुर में भारतीय सैनिकों ने विद्रोह का बिगुल फूंक दिया। सिंगापुर की छावनी में भारतीय सैनिकों ने सैकड़ों अंग्रेज सैनिकों व अधिकारियों को मौत के घाट उतार दिया। सिंगापुर की छावनी में सैनिक विद्रोह में शामिल भारतीय सैनिकों में अधिकतर तत्काल पंजाब (हरियाणा) के थे। करीब 214 सैनिकों ने विद्रोह किया था। इस विद्रोह को दबाने के लिए अंग्रेजों ने 41 लोगों को पकड़कर सिंगापुर की 9 फीट ऊंची दीवार के सामने सरेआम गोली से उड़ा दिया। संवाद
शहादत में शामिल थे 18 सैनिक
शहादत देने वालों में तत्कालीन हिसार जिले के गांव बलियाली, जमालपुर, गुजरानी, चांग, किरावड़, गुजरानी, चौधरीवास, भूरटाना, पाटन, लितानी, ढाणी गुजरान व आसपास के 18 सैनिक शामिल थे। सैनिकों की शहादत के लिए गांव जमालपुर में एक शहीद स्मारक बनाया गया। आज उस स्मारक को लोग भूल चुके हैं और हालात ये हैं कि आज वह स्मारक जमींदोज होने के कगार में आ गया है। समय-समय पर पशु अस्पताल की बिल्डिंग का जीर्णोद्धार तो होता रहा परंतु शहीद स्मारक की तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया। हालत यह हो गए कि आज वह अपने अस्तित्व खोने के कगार पर है।
गांव के सरकारी पशु अस्पताल में स्थित शहीद स्मारक के सुंदरीकरण का पंचायत ने प्रस्ताव किया हुआ है। प्रशासन से मंजूरी मिलते ही सुंदरीकरण का काम करवाया जाएगा।
-राजकुमार आल्हान, सरपंच गांव जमालपुर प्रथम