भिवानी। सरल केंद्र में परिवार पहचान पत्र की त्रुटियों को ठीक कराना सरल नहीं है। मानव सूचना संसाधन विभाग के पोर्टल पर कई आप्शन बंद होने के बाद लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। इस वजह से भिवानी जिले में 1500 कुनबों को फैमिली की पहचान नहीं मिली है। वहीं दस हजार से अधिक आवेदनों में फैमिली आईडी की त्रुटि ठीक होने के मामले भी अटक गए हैं।
कामन सर्विस सेंटरों पर भी पोर्टल पर ऑप्शन बंद होने के कारण त्रुटि ठीक कराने की रिक्वेस्ट यानी आवेदन भी नहीं हो पा रहे हैं। भिवानी जिले में तीन लाख 17 हजार से अधिक परिवार पहचान पत्र बन चुके हैं। साढ़े 13 लाख की आबादी के भिवानी जिले में लगातार परिवार बढ़ रहे हैं। मगर बढ़े हुए परिवारों को अब अलग पहचान नहीं मिल रही है, क्योंकि मुख्यालय ने नई फैमिली आईडी पर पाबंदी लगा दी है। दस हजार से अधिक फैमिली आईडी की त्रुटियां लंबित हो गई हैं, जिनमें अधिकांश में मृत हो चुके सदस्यों को हटाया जाना शामिल है, जबकि पैदा हुए नए सदस्यों को जोड़ना, किसी सदस्य की आय की वेरिफिकेशन, बच्चों की भी आमदनी फैमिली आईडी में दर्शाया जाना, बिजली बिल ज्यादा जुड़ना, एक फैमिली में कई बिजली बिल जोड़े जाना सहित अनेक समस्याएं हैं। इनका निदान पोर्टल के ऑप्शन बंद होने से अटक गए हैं। हालांकि कुछ परिस्थितियों में फैमिली आईडी की त्रुटियां अब भी ठीक हो रही हैं। संवाद
योजनाओं का लाभ लेने में आ रही कठिनाई
सभी सरकारी योजनाओं को ऑनलाइन आवेदनों से जोड़ा जा चुका है। ऐसे में किसी भी योजना के लिए आवेदन में पहली शर्त फैमिली आईडी अनिवार्य है। ऐसे में अगर फैमिली आईडी में कोई त्रुटि है तो फिर पात्र परिवार भी अपात्र की श्रेणी में आ जाता है। जब तक उस त्रुटि को ठीक नहीं कराया जाएगा और मांगे गए दस्तावेजों को पूरा नहीं किया जाएगा तब तक योजना का लाभ मिलना मुश्किल है। ऐसे भी कई लोग चक्कर लगा रहे हैं, जिन्हें न बेटी की शादी में कन्यादान मिला है न मकान निर्माण के लिए कोई पैसा। ये लोग बीपीएल की श्रेणी में तो हैं, मगर सरकारी योजनाओं के पात्र की सूची से बाहर हो चुके हैं।
आमदनी अठन्नी खर्चा रुपइया
कई परिवारों की हालत तो ऑनलाइन डाटा की वजह से फैमिली आईडी में ऐसी है कि आमदनी अठन्नी फिर भी खर्चा रुपइया है। यानी उनके घर में कोई सरकारी नौकरी या फिर स्थायी रोजगार नहीं है। इसकी वजह से आमदनी ज्यादा नहीं दिखाई गई है, मगर बिजली बिल हर माह हजारों का भर रहे हैं। जिन गरीब परिवारों के बिजली बिल भी ज्यादा आमदनी न होने के बावजूद सालाना 12 हजार से अधिक भुगतान है, वे भी फैमिली आईडी से परेशानी में आ गए हैं। ये परिवार कभी बिजली निगम दफ्तर तो कभी सरल केंद्र पहुंच फैमिली आईडी, आमदनी और बिल की रसीद दिखा-दिखा थक चुके हैं।
मानव सूचना संसाधन विभाग के पोर्टल पर कई ऑप्शन मुख्यालय से बंद हो चुके हैं। इन ऑप्शन से जुड़ी कोई भी त्रुटि ठीक नहीं हो सकती है। हालांकि सीएससी के माध्यम से आवेदन पहुंच रहे हैं, मगर इनका मुख्यालय के आदेशों तक समाधान संभव नहीं है। जो ऑप्शन खुले हैं, उनसे संबंधित त्रुटियां व फैमिली आईडी में आय की वेरिफिकेशन लगातार चल रही है। पोर्टल को भी अपडेट किए जाने का काम चल रहा है।
- खुशवंत सिंह, जिला प्रबंधक, मानव सूचना संसाधन विभाग भिवानी