भिवानी। निमोनिया सर्दियों के मौसम में छींकने या खांसने से फैलने वाली एक संक्रामक बीमारी है। नागरिक अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 30 से अधिक बच्चे निमोनिया से ग्रस्त सामने आ रहे हैं। जबकि अस्पताल के नीकू वार्ड में 35 बच्चे भर्ती हैं, जिनमें से अधिकतर को तेज बुखार, खांसी, जुकाम की दिक्कत है। विशेषज्ञों का कहना है कि निमोनिया से ग्रसित होने का खतरा पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सबसे ज्यादा है। निमोनिया से बच्चों के ग्रसित होने की संभावना सर्दियों के मौसम में अधिक होती है।
जिले में पिछले 15 दिन से बच्चों में निमोनिया से संक्रमण के आंकड़ों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। निमोनिया की चपेट में बच्चे, युवा और बुजुर्ग यानी हर आयु वर्ग के लोग आ सकते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य का ध्यान रखना अति आवश्यक है। आज विश्व निमोनिया दिवस है। यह रोग बैक्टीरिया, वायरस या फंगस से फेफड़ों में संक्रमण से होता है। इसमें एक या दोनों फेफड़ों के वायु के थैलों में द्रव या मवाद भरकर उसमें सूजन पैदा हो जाती है जिससे सांस लेने में तकलीफ होती है। बच्चों को सर्दी में निमोनिया होने का खतरा सबसे अधिक होता है जो जानलेवा भी हो सकता है।
रोग से बचाव के लिए टीकाकरण जरूरी
सुखद बात यह है कि इस गंभीर रोग को नियमित टीकाकरण द्वारा पूरी तरह रोका जा सकता है। इसलिए अपने बच्चों को संपूर्ण टीकाकरण के अंतर्गत सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर नि:शुल्क उपलब्ध पीसीवी का टीका जरूर लगवाएं। पीसीवी या न्यूमोकॉकल कॉन्जुगगेट वैक्सीन का टीका शिशु को दो माह, चार माह, छह माह, 12 माह और 15 माह पर लगाने होते हैं।
निमोनिया के लक्षण
- छोटे बच्चों को बुखार के साथ पसीना व कंपकंपी होने लगती है।
- जब बच्चों को बहुत ज्यादा खांसी हो रही हो।
- वह अस्वस्थ दिख रहा हो।
- उसे भूख ना लग रही हो।
घर में रखें सफाई का ध्यान
निमोनिया किसी भी मौसम में हो सकता है, लेकिन सर्दी के मौसम में इसकी आशंका ज्यादा बढ़ जाती है। बच्चों को उतने ही कपड़े पहनाएं, जिससे उसका शरीर गर्म रहे। अगर एंटी-बायोटिक दी जाती हैं तो पूरा कोर्स करें, नहीं तो बीमारी वापस आ सकती है। घर के अंदर या आसपास के प्रदूषण को कम करके और साफ-सफाई का पूरा खयाल रखें।
सर्दी के मौसम में निमोनिया का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में बच्चों को सर्दी से बचा कर रखें। उन्हें गर्म कपड़े पहनाएं और सुबह-शाम घर से बाहर न निकलने दें। पांच साल तक बच्चे में निमोनिया का खतरा बना रहता है। ऐसे में पांच साल की आयु तक उनका विशेष ध्यान रखना जरूरी है। बच्चे को खांसी, जुकाम, बुखार होने पर नजदीकी चिकित्सक से जांच अवश्य करवाएं।
- डॉ. रिटा सोसिदिया, बाल रोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल।