भिवानी। जापानी इंसेफेलाइटिस वायरस को लेकर जिला स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। स्वास्थ्य विभाग ने इस बीमारी से संक्रमित मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं देने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की हैं। विभाग ने जिला नागरिक अस्पताल की चौथी मंजिल पर वार्ड नंबर नौ में 32 बेड का आइसोलेशन वार्ड बनाया है। इसमें जापानी इंसेफेलाइटिस वायरस के अलावा डेंगू, मलेरिया व चिकनगुनिया के मरीजों को एडमिट किया जाएगा। बीमारी की जांच के लिए संदिग्ध के सैंपल पीजीआई रोहतक में भेजे जाएंगे, जहां उनकी बीमारी की पुष्टि होगी।
वहीं अस्पताल में आने वाले बुखार व बच्चों के स्वास्थ्य की बारीकी से जांच की जा रही है। इसमें विशेष रूप से उन मरीजों का फोकस किया जा रहा है, जोकि 10 से 12 दिनों से बुखार से ग्रस्त हैं। साथ ही उन बच्चों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है जिन्हें बार-बार चक्कर या दौरे आ रहे हैं। चिकित्सकों ने बताया कि जापानी इंसेफेलाइटिस में कई ऐसे भी मामले सामने आए हैं, जिन्हें कोई भी लक्षण नहीं थे और वे इस बीमारी से ग्रस्त हैं।
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यह है जापानी इंसेफेलाइटिस
जापानी इंसेफेलाइटिस वायरस से होने वाली बीमारी है। यह बीमारी क्यूलेक्स मादा मच्छर के काटने से होता है। यह वायरस शरीर के तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है। इससे मरीज की जान तक जा सकती है।
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ऐसे फैलती है जापानी इंसेफेलाइटिस
जिला नागरिक अस्पताल के सीनियर फिजिशियन डॉ. यतिन गुप्ता ने बताया कि यह बीमारी धान की खेती या जहां पीने के लिए साफ पानी की कमी है, वहां अधिक फैलती है। अधिक गर्मी व नमी के मौसम में यह बीमारी होने लगती है। इसके कीटाणु सांस व मुंह से शरीर में प्रवेश करते हैं। जिन जगहों पर गंदगी रहती है। वहां तेजी से यह बीमारी फैलने लगती है। यह खाना बनाने में सफाई की कमी, गंदा पानी पीने व खाने से पहले हाथ साफ न करने से इंफेक्शन से फैलती है। इस बीमारी की चपेट में अधिकतर बच्चे आते हैं।
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ये हैं लक्षण
सिर दर्द होना, तेज बुखार होना, मांसपेशी में दर्द, बेहोश हो जाना, शरीर के अंगों में जकड़न होना, चमकी व ऐंठन होना इसके लक्षण हैं। वहीं बच्चे का सुस्त होना व बेहोश हो जाना, शरीर सुन्न पड़ जाना व कोई हरकत ना होना आदि प्रमुख लक्षण हैं।
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हमारे यहां इस जापानी इंसेफेलाइटिस वायरस से ग्रस्त अब तक कोई मरीज नहीं मिला है। मगर शोध के अनुसार बच्चों में इस बीमारी का अधिक संक्रमण पाया है। एक सप्ताह से अधिक बुखार होने पर चिकित्सक से जांच अवश्य करवा लें, ताकि समय पर उपचार हो सकें।
- डॉ. रिटा सिसोदिया, बाल रोग विशेषज्ञ, जिला नागरिक अस्पताल।
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जापानी इंसेफेलाइटिस का जिले में अभी तक कोई भी मरीज सामने नहीं आया है। इसकी जांच और उपचार के लिए चिकित्सकों को विशेष निर्देश दिए हैं। साथ ही संक्रमित मरीजों के उपचार और उन्हें अस्पताल में दाखिल करने के लिए अस्पताल से आइसोलेशन वार्ड बनाया है। नागरिकों से अपील है कि स्वास्थ्य में दिक्कत होने पर जांच अवश्य करवा लें।
- डॉ. रघुबीर शांडिल्य, सिविल सर्जन।