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पितरों के आशीर्वाद से बरसता है सुख सौभाग्य और पितृदोष लगने पर बढ़ती है परेशानियां : डॉ. अशोक गिरि

Fri, 29 Sep 2023 11:07 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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भिवानी।
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सिद्धपीठ बाबा जहरगिरी आश्रम के पीठाधीश्वर महंत डाॅ. अशोक गिरि महाराज ने पितृ पक्ष का महत्व एवं उससे जुड़े जरूरी नियमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति में मान्यता है कि श्रद्धा के साथ पितरों का श्राद्ध करने पर पितरों का आशीर्वाद बरसता है। इससे जीवन में सभी प्रकार के सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है और पितरों की उपेक्षा करने पर व्यक्ति को पितृदोष लगता है। इसके कारण परेशानियां बढ़ती हैं।


श्राद्ध का महत्व

महंत डाॅ. अशोक गिरि महाराज ने बताया कि पितृ पक्ष के दौरान लोग अपने पितरों को याद करके उनका पूजन करते हैं। उनके लिए श्राद्ध कर्म करते हैं। सनातन धर्म में श्राद्ध का विशेष महत्व होता है। श्राद्ध का अर्थ है श्रद्धापूर्वक किया हुआ वह संस्कार जिससे पितरों को संतुष्टि प्राप्त होती है। पितृ पक्ष के दौरान सभी पितृ पृथ्वी लोक में वास करते हैं और अपने परिवार को आशीर्वाद देते हैं। पितृ पक्ष के दौरान पितृ ये उम्मीद करते हैं कि उनकी संतानें उनके लिए श्राद्ध, तर्पण या पिंडदान आदि करेंगे, क्योंकि इन कार्यों से वे तृप्त होते हैं।
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इस तरह निकालें श्राद्ध
डॉ. अशोक गिरि महाराज ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार पितृपक्ष में किसी भी प्रकार का शुभ कार्य नहीं किया जाता है। इस दौरान सिर्फ पितरों के लिए पिंडदान, तर्पण आदि करने का विधान है। इसके तहत परिवार से जुड़े किसी दिवंगत व्यक्ति की तिथि पर किसी ब्राह्मण पुरुष या महिला को आदर के साथ बुलाकर सात्विक भोजन कराना चाहिए। साथ ही साथ उसे अपनी क्षमता के अनुसार दान देकर सम्मानपूर्वक विदा करना चाहिए। महंत ने बताया कि पितृपक्ष के दौरान भूलकर भी तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए तथा न ही पितरों के निमित्त किसी चीज का दान करते समय किसी भी प्रकार का अभिमान और प्रदर्शन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के दिनों में पितरों के लिए भोजन रखें तथा वह भोजन गाय, कौआ, कुत्ता आदि को खिला दें। हिंदू धर्म में मान्यता है कि उनके माध्यम से ये भोजन पितरों तक पहुंचता है।


पितृ पक्ष में न करें इन चीजों का सेवन

अशोक गिरि महाराज ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष के दिनों में लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे पितर नाराज हो जाते हैं। साथ ही पितृ पक्ष के दौरान अपने घर के बुजुर्गों और पितरों का अपमान न करें। इससे पितर नाराज हो जाते हैं और पितृ दोष लग सकता है।
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इन लोगों को निकालना चाहिए श्राद्ध
अशोक गिरि महाराज ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध हमेशा अपनी ही भूमि या फिर अपने घर में किया जाना चाहिए। श्राद्ध के लिए हमेशा दक्षिण की ओर ढलान वाली भूमि खोजनी चाहिए, क्योंकि दक्षिणायन में पितरों का प्रभुत्व होता है, जिस भूमि पर श्राद्ध किया जाए। उसे अच्छी तरह से साफ करके गोबर, गंगा जल आदि से पवित्र करना चाहिए। श्राद्ध का अधिकार केवल पुत्र को दिया गया है यदि पुत्र न हो तो पुत्री का पुत्र यानि नाती भी श्राद्ध कर सकता है। पुत्र व पौत्र की गैर हाजिरी में विधवा स्त्री श्राद्ध कर सकती है, परन्तु पत्नी का श्राद्ध पति तभी कर सकता है जब उसे कोई पुत्र न हो यदि किसी का पुत्र है तो उसे अपनी पत्नी का श्राद्ध नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में पुत्र को ही अपनी माता का श्राद्ध करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार गोद लिया उत्तराधिकारी भी श्राद्ध करने के लिए योग्य है।
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