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Bhiwani News: बाहरी कॉलोनियों में भूमिगत जल पीने लायक नहीं, जलघर के टैंकों के आसपास बनाए बोरवेल भी खराब

Mon, 30 Sep 2024 03:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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भिवानी। शहरी दायरे की बाहरी कॉलोनियों में भूमिगत पानी पीने लायक नहीं है। विभागीय लैब में हुई पानी की जांच में यह तथ्य साबित हो गया है। हालांकि इन कॉलोनियों में रहने वाले लोग कई साल से पानी के टैंकर खरीदकर पानी पीने के लिए मजबूर हैं। पेयजल आपूर्ति में भी गंदा पानी आ रहा है। गंदे पानी की वजह से बीमारी का खतरा है।
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जिला मुख्यालय में शहरी दायरा लगातार बढ़ रहा है। शहर के आसपास गांवों की कृषि भूमि में तेजी से प्लाॅट काटे जा रहे हैं, लेकिन यहां रहने वाले लोगों को मीठा पानी नहीं मिल रहा है क्योंकि यहां का भूमिगत खारा पानी पीने लायक नहीं है। कई जगह तो भूमिगत पानी घरेलू कार्याें में इस्तेमाल होने लायक भी नहीं है। इस पानी का टीडीएस हजारों में आंका जा रहा है। इस खारे पानी के संपर्क में आने पर लोगों को दाद, खाज, खुजली और एलर्जी तक हो रही है।
शहर में भूमिगत जलस्तर काफी ऊपर है। शहर के अंदरूनी हिस्से में तो भूमिगत जलस्तर मात्र दस फुट पर है। इस कारण शहर के अंदर लगे हैंडपंप पानी की किल्लत के दिनों में लोगों की प्यास बुझाते हैं लेकिन शहर के बाहरी दायरे की कॉलोनियों में भूमिगत जलस्तर 15 से 20 फुट गहराई में है, लेकिन ये पानी बेहद खराब है। इसके अंदर टीडीएस बढ़ने के अलावा इस पानी का स्वाद भी काफी खारा है।
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हालुवास गेट फाटक पार सूर्यानगर निवासी देविका, भूमिक, महावीर और रोशन का कहना है कि यहां पानी करीब 15 फुट गहराई में उपलब्ध है, लेकिन हैंडपंप से मिल रहा पानी कड़वा है। इसे पीना तो दूर दूसरे कार्यों में भी सीमित मात्रा में इस्तेमाल किया जा सकता है।
सिटी स्टेशन लाइनपार कॉलोनी में महा सिंह, कर्मबीर, राजबीर का कहना है कि भूमिगत पानी पीने लायक नहीं है। यहां हैंडपंप तो लगाए गए हैं, लेकिन इस पानी को लोग अन्य दिनचर्या के कार्यों में ही इस्तेमाल कर पाते हैं। हांसी रोड की देवनगर कॉलोनी निवासी नीलम, प्रियंका, किरण ने बताया कि यहां का भूमिगत पानी पीने लायक नहीं है। लोगों को यहां रहते करीब तीन दशक हो चुके हैं। उन्हें हमेशा टैंकर से ही पानी खरीदकर पीना पड़ता है, जबकि देवनगर कॉलोनी के कुछ हिस्से मेंं पानी की लाइनें भी डाली गई हैं, लेकिन लाइन के अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है।

जलघर के टैंकों के आसपास लगे बोरवेल का पानी भी खराब
महम रोड स्थित पुराने जलघर परिसर में टैंकों के आसपास जनस्वास्थ्य विभाग ने कई बोरवेल लगाए थे। करीब 16 बोरवेल में से मात्र चार ही चालू हैं, बाकी बोरवेल का पानी का स्वाद बिगड़ चुका है। यानी ये बोरवेल अब मीठा पानी के बजाय खारा पानी उगल रहे हैं। इसी कारण विभाग ने इन्हें बंद कर दिया है। पुराने जलघर में भूमिगत पानी भी काफी ऊपर है। इसके बावजूद यहां का पानी भी अब खराब होने लगा है जबकि विभाग ने यहां दो नए टैंक बनाए हैं, जिनकी तलहटी कंकरीट से बनी है जबकि पुराने टैंकों के पानी से भूमिगत जलस्तर संभरण भी होता रहता था। यही वजह है कि अब भूमिगत जलस्तर का स्वाद लगातार बिगड़ रहा है।

शहर के बाहरी दायरे की अधिकतर रिहायशी कॉलोनियों में भूमिगत पानी पीने लायक नहीं है। यहां के पानी में टीडीएस भी डेढ़ हजार से अधिक आ रहा है। अधिक दोहन के सापेक्ष यहां भूमिगत पानी रीचार्ज कम होना भी इसका एक कारण है। लैब की जांच में इन कॉलोनियों के पानी के सैंपल भी फेल हो रहे हैं। -राजू मेहरा, कनिष्ठ सहायक वैज्ञानिक, मिट़्टी एवं जल परीक्षण प्रयोगशाला, भिवानी।
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