भिवानी। अगर एक बार जिद्द पर अड़ जाए तो असंभव को भी संभव कर सकते हैं। ऐसा ही कर दिखाया है शहर की बेटी नेहा भगासरा ने। उन्होंने बचपन से ही यह ठान लिया था कि वह देश की सबसे कम उम्र वर्ग की अधिकारी बनेगी। इसके लिए चाहे कितनी भी मेहनत करनी पड़े।
नेहा ने 21 साल की उम्र में यूपीएससी की परीक्षा को पहले प्रयास में पास करके साल 2023 बैच में आईएएस अधिकारी बन गई। उन्होंने 719 रैंक हासिल किया था। बस कुछ ही दिनों में उनकी ट्रेनिंग भी शुरू होने वाली है। इसके लिए वह दिल्ली गई हुई है। लगातार 8 से 10 घंटे पढ़ाई करके उन्होंने अपने मां-बाप वह प्रदेश का नाम अधिकारी बनकर चमका दिया है।
घर पर ही रहकर की तैयारी
नेहा ने स्कूली शिक्षा पंडित सीताराम शास्त्री कन्या सीनियर सेकेंडरी स्कूल भिवानी से 15 वर्ष की आयु में पूरी कर ली थी। स्नातक की पढ़ाई उन्होंने आदर्श महिला महाविद्यालय भिवानी से 18 वर्ष की आयु में पूरी कर ली थी। इसके साथ-साथ वह प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी घर पर ही करती थी। उन्होंने कभी बाहर कोचिंग करने पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, जितना हो सका घर पर ही पढ़ी। उन्हें इस बात का बहुत गर्व है कि वह 21 वर्ष की आयु में अधिकारी बन गई है। उनके बैच में जितनी भी लड़कियां हैं वह 25 वर्ष की आयु से ऊपर की हैं।
नेहा पास कर चुकी हैं ये परीक्षाएं
यूपीएससी परीक्षा में अपना लेवल देखने के लिए वह कई परीक्षाएं दे चुकी हैं। उन्होंने सीडीएस चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की परीक्षा पास की थी। इसके अलावा कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल परीक्षा भी पास की थी। पर उन्होंने कौनसी भी नौकरी नहीं की। क्योंकि उनका मन था कि वह आईएएस या आईपीएस बने।
उनके पिता है उनके आदर्श
नेहा अपने पिता मुनेश कुमार को अपना आदर्श मानती हैं। वह एक सरकारी अध्यापक हैं और उन्होंने कभी भी अपने काम के साथ कोई गद्दारी नहीं की है। हमेशा से ही ईमानदारी से अपने काम को करते आए हैं। उनकी माता मुकेश भी अध्यापक हैं। इन दोनों की मेहनत को देखकर नेहा खूब प्रभावित होती थी और अपने सपने को पूरा करने में दिन-रात मेहनत करती थी। आईएएस की खबर जब उन्होंने अपने माता-पिता को दी तो उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा।
महिलाओं की शिक्षा व सुरक्षा में करना चाहती है सुधार
नेहा युवाओं और महिलाओं की शिक्षा व सुरक्षा में सुधार करना चाहती हैं। उनका कहना है कि शिक्षा प्रणाली में कई बड़े बदलाव होने चाहिए। भिवानी में बच्चों को अगर शुरू से ही उनकी अच्छी स्कूलिंग शिक्षा दी जाए तो हर बच्चा अपने सपने को पूरा कर सकता है। यहां पर बहुत कमियां हैं जिस वजह से बच्चों को अपनी प्रतियोगी परीक्षा करने के लिए बाहर जाना पड़ रहा है।
मैं उन लड़कियों को यह कहना चाहूंगी जो अपने परिवार को पहल देती हैं और अपने सपने को किसी संदूक में बंद करके छोड़ देती हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए। अपने परिवार को भी अहमियत दें लेकिन सबसे पहले खुद को रखें और अपने सपने पूरे करें। अगर मेहनत और लगन से कोई भी काम शुरू किया जाए तो उसमें सफलता जरूर मिलती है। आज के समय में लड़कियां अपने माता-पिता को समझा सकती हैं ताकि वह अपने सपने पूरे कर सकें। माता-पिता को भी अपने बच्चों को पूरा सहयोग देना चाहिए।
- नेहा भगासरा, आईएएस